तीजन एक युग थीं। उन्होंने पंडवानी की कापालिक शैली में पुरुषों का वर्चस्व तोड़ा। ओज और ऊर्जा से भरी प्रस्तुतियों को जन-जन तक पहुंचाया और देश- विदेश के मंचों पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत किया।