भोपाल कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल नया आपराधिक मामला दर्ज होना सदाचार बॉन्ड का उल्लंघन नहीं है। डीसीपी का जेल भेजने का आदेश रद्द करते हुए जांच जरूरी बताई।