Spontaneous Coronary Artery Dissection Causes: 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है. आमतौर पर जब हार्ट अटैक की बात होती है, तो उम्रदराज लोगों, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या धूम्रपान जैसी वजहों का जिक्र किया जाता है. लेकिन दिल की बीमारी की तस्वीर हमेशा इतनी सीधी नहीं होती. खासकर युवा और देखने में पूरी तरह स्वस्थ महिलाओं में भी अचानक हार्ट अटैक हो सकता है, भले ही उनमें हार्ट अटैक के सामान्य जोखिम न हों.ऐसे मामलों में एक स्थिति सामने आती है, जिसे स्पॉन्टेनियस कोरोनरी आर्टरी डिसेक्शन यानी SCAD कहा जाता है. यह हार्ट अटैक का एक अलग और कम पहचाना जाने वाला कारण है. इसमें दिल की नस की अंदरूनी दीवार में अचानक चोट या दरार आ जाती है. इसकी वजह से खून नस की दीवार की परतों के बीच जमा होने लगता है और दिल तक पहुंचने वाला खून का बहाव रुक सकता है.सामान्य हार्ट अटैक से कैसे अलग है SCAD?सामान्य हार्ट अटैक में अक्सर दिल की नस में जमा कोलेस्ट्रॉल की परत फटती या खराब हो जाती है. इसके बाद वहां खून का थक्का बन सकता है, जो खून के बहाव को रोक देता है. SCAD में स्थिति अलग होती है. इसमें नस की दीवार अचानक अलग होने लगती है और अंदर जमा खून रास्ते को दबा सकता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मेयो क्लिनिक में दिल की बंद नसों के इलाज से जुड़े एक्सपर्ट डॉ. राजीव गुलाटी के मुताबिक, SCAD में नस को लंबे समय से जमा हो रही चर्बी या कोलेस्ट्रॉल की वजह से नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि नस की दीवार में अचानक होने वाले बदलाव के कारण परेशानी होती है.युवा महिलाओं में क्यों देखा जा रहा है SCAD?SCAD के ज्यादातर मामले युवा और मध्यम उम्र की महिलाओं में देखे जाते हैं. एम्स दिल्ली के हार्ट रोग एक्सपर्ट और प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के मुताबिक, SCAD के करीब 80 से 90 फीसदी मामले महिलाओं में होते हैं. 50 साल से कम उम्र की महिलाओं में होने वाले हार्ट अटैक के कुछ मामलों के पीछे SCAD की भूमिका हो सकती है. इस बीमारी और महिलाओं में इसके ज्यादा पाए जाने के बीच शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव को लेकर रिसर्च चल रही है. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन शरीर की नसों के टिश्यू और उनकी बनावट को प्रभावित करते हैं. हालांकि ये हार्मोन सीधे तौर पर SCAD की वजह नहीं माने जाते, लेकिन इनके स्तर में होने वाले बदलाव कुछ महिलाओं में नसों की दीवार को कमजोर कर सकते हैं. गर्भावस्था के बाद का समय भी महत्वपूर्ण माना जाता है. डॉ. गुलाटी के अनुसार, SCAD के कुछ मामले बच्चे के जन्म के बाद सामने आते हैं और इनमें से कई मामले डिलीवरी के शुरुआती दिनों में होते हैं.किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?SCAD की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके मरीजों में अक्सर हार्ट अटैक के सामान्य जोखिम नहीं होते. महिला युवा हो सकती है, एक्टिव हो सकती है और उसे डायबिटीज, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल या धूम्रपान जैसी कोई समस्या न हो. ऐसे में सीने में दर्द को गंभीरता से न लेने का खतरा रहता है. डॉ. रॉय के मुताबिक, सीने में दर्द या बेचैनी SCAD के मरीजों में आम लक्षण है. ईसीजी में बदलाव और खून की जांच में हार्ट से जुड़े संकेत भी दिखाई दे सकते हैं. इसलिए कम उम्र होने या सामान्य वजन और अच्छी फिटनेस को देखकर हार्ट अटैक की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जाना चाहिए.तनाव और ज्यादा मेहनत भी हो सकते हैं कारणSCAD के पीछे एक ही वजह नहीं होती. रिसर्च में बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत, भारी वजन उठाना, बहुत ज्यादा मानसिक तनाव, गर्भावस्था और हार्मोनल बदलाव जैसे संभावित कारण सामने आए हैं. कुछ मरीजों में पहले किसी तरह का शारीरिक या मानसिक तनाव होने की जानकारी भी मिली है. इसके अलावा फाइब्रोमस्कुलर डिस्प्लेसिया यानी FMD जैसी नसों से जुड़ी बीमारी का भी SCAD के साथ संबंध देखा गया है. यह ऐसी बीमारी है जिसमें चर्बी की परत जमा हुए बिना ही नसों की बनावट में बदलाव हो सकता है.SCAD का इलाज सामान्य हार्ट अटैक से अलग हो सकता हैSCAD का इलाज हर मरीज में एक जैसा नहीं होता. अगर नस पूरी तरह बंद हो गई है और हार्ट तक खून का बहाव वापस शुरू करना जरूरी है, तो गुब्बारे की मदद से एंजियोप्लास्टी करनी पड़ सकती है. हालांकि कुछ मामलों में डॉक्टर स्टेंट लगाने से बच सकते हैं, क्योंकि इससे नस की अंदरूनी चोट और बढ़ने का खतरा हो सकता है. अगर नस पूरी तरह बंद नहीं हुई है, तो कई मामलों में डॉक्टर मरीज को अस्पताल में निगरानी में रखते हैं, क्योंकि प्रभावित नस समय के साथ खुद भी ठीक हो सकती है. दवाओं का इस्तेमाल भी मरीज की हालत के हिसाब से किया जाता है.इसे भी पढ़ें : किन लोगों को नहीं खाना चाहिए पान? जान लें काम की बातSCAD के बाद भी सामान्य जिंदगी संभव हैSCAD होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को हमेशा के लिए एक्सरसाइज छोड़ देनी चाहिए. डॉक्टर की सलाह के अनुसार हार्ट की रिकवरी के लिए जरूरी इलाज और नियमित, सामान्य स्तर की शारीरिक गतिविधि की जा सकती है. हल्के वजन वाली कसरत और सामान्य गति वाली एरोबिक एक्सरसाइज भी की जा सकती है. हालांकि बहुत ज्यादा वजन उठाने, शरीर को पूरी तरह थका देने वाली कसरत और बहुत ज्यादा मेहनत वाली एक्सरसाइज से बचने की सलाह दी जाती है.इसे भी पढ़ें- World Heart Day: हार्ट अटैक आने से पहले शरीर देता है ये 7 संकेत, न करें नजरअंदाज