उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल में पिंडदान को अंतिम और मोक्षदायी माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि यहां भगवान शिव को भी ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति मिली थी। मान्यतानुसार, ब्रह्मकपाल में पिंडदान करने के बाद पूर्वजों के लिए दोबारा पिंडदान करने की आवश्यकता नहीं होती।