दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 साल की रेप पीड़ित बच्ची को ट्रायल कोर्ट की जज का लिखा हुआ संदेश पहुंचाने का आदेश दिया है। बच्ची ने कोर्ट से कहा था कि जिस व्यक्ति को वह ‘अंकल’ कहती थी, उसे तब तक जेल में रखा जाए जब तक वह बूढ़ा न हो जाए। ट्रायल कोर्ट की जज रजनी रंगा ने फैसले के अंत में बच्ची के लिए व्यक्तिगत संदेश लिखा था। इसमें कहा गया कि आरोपी को प्राकृतिक जीवन के बाकी समय जेल की सजा दी गई है और वह फिर कभी आजाद नहीं होगा। हाईकोर्ट ने इस संदेश को ‘हिम्मत का संदेश’ बताया। हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया? दिल्ली हाईकोर्ट ने नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली DLSA को निर्देश दिया कि जज का संदेश प्रिंट कर बच्ची या उसके परिवार को सौंपा जाए। कोर्ट ने इसे 2 हफ्ते के भीतर बच्ची तक पहुंचाने को कहा। साथ ही ₹10.50 लाख की मुआवजा राशि देने की स्थिति पर भी रिपोर्ट मांगी। 7 साल की थी बच्ची, अब 10 साल की कोर्ट के मुताबिक, घटना 23 जुलाई 2023 की है। उस समय बच्ची 7 साल की थी और अब उसकी उम्र 10 साल है। मामले में आरोपी सुमित शक्या को 12 साल से कम उम्र की बच्ची के खिलाफ गंभीर यौन अपराध और आपराधिक धमकी के मामले में दोषी ठहराया गया है। आरोपी को उम्रभर जेल की सजा ट्रायल कोर्ट ने POCSO एक्ट के तहत आरोपी को प्राकृतिक जीवन के बाकी समय तक कठोर कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा दी थी। आपराधिक धमकी के मामले में 5 साल की कठोर कैद और ₹20 हजार जुर्माना लगाया गया। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। ₹10.50 लाख मुआवजा तय ट्रायल कोर्ट ने बच्ची और उसके परिवार की परेशानी, अपराध की प्रकृति और उसके लंबे समय तक पड़ने वाले असर को देखते हुए ₹10.50 लाख मुआवजा तय किया था। हाईकोर्ट ने DLSA सचिव से इस भुगतान की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। जमानत पर तुरंत राहत नहीं हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा पर रोक लगाने और उसे जमानत देने की मांग पर फिलहाल राहत नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि मामले में उपलब्ध सबूतों, जिसमें फोरेंसिक सबूत भी शामिल हैं, को देखते हुए इस स्तर पर सजा रोकना उचित नहीं है