सिनेमा बनाने के लिए न बड़ा बजट, न महंगा कैमरा और न ही मुंबई जैसा सेट। जरूरत है तो बस कहानी कहने के जुनून और उसे पर्दे पर उतारने के जज्बे की। खंडवा के ग्रामीण अंचल के युवाओं ने इसी सोच को हकीकत में बदल दिया है।