महाराष्ट्र में SIR के बीच CEO की 4 मांगें:चुनाव आयोग को लेटर लिखा; कहा- ERO को सुनवाई और दस्तावेज पर फैसला लेने की छूट मिले

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महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने SIR के बीच चुनाव आयोग को लेटर लिखकर ECINet सॉफ्टवेयर में 4 बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची का काम देखने वाले इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ERO को कानून के तहत जो अधिकार मिले हैं, उन्हें सॉफ्टवेयर में भी इस्तेमाल करने की सुविधा होनी चाहिए। चोकलिंगम ने 24 सितंबर को आयोग यह लेटर भेजा, जिसकी जानकारी अब सामने आई है। उन्होंने आयोग से कहा है कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में ‘तार्किक गड़बड़ी’ मिले, उनमें ERO खुद तय कर सकें कि किसे सुनवाई के लिए बुलाना है, कौन से दस्तावेज लेने हैं और किन मामलों को बिना सुनवाई के निपटाया जा सकता है। यह मांग ऐसे समय आई है, जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी ECINet में ERO के अधिकार सीमित होने पर सवाल उठा चुके हैं। संधू ने कहा था कि मतदाता सूची से जुड़े फैसले ERO, जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, लेकिन सॉफ्टवेयर का कंट्रोल दिल्ली में होने से इन अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। चुनाव आयोग से महाराष्ट्र के CEO की 4 मांगें- 1. सुनवाई से छूट का विकल्प चोकलिंगम ने मांग की कि अगर मतदाता ने पर्याप्त और सही दस्तावेज जमा कर दिए हैं, तो ईआरओ को यह तय करने की सुविधा मिले कि उसे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी है या नहीं। अभी सॉफ्टवेयर में ऐसा फैसला लेने का विकल्प सीमित था। 2. दूसरे दस्तावेज स्वीकार करने की सुविधा ERO को आयोग की तय सूची के अलावा अन्य या उसके बराबर के वैध दस्तावेज स्वीकार करने का विकल्प देने की मांग की गई। CEO ने कहा कि दस्तावेजों की सूची को अंतिम न मानकर जरूरत के हिसाब से दूसरे दस्तावेज लेने की सुविधा होनी चाहिए। 3. ‘तार्किक गड़बड़ी’ वाले मामलों में फैसला मांग है कि ऐसे मामलों में ERO को खुद तय करने की सुविधा मिले कि उपलब्ध जानकारी और दस्तावेजों के आधार पर मामला साफ है या आगे सुनवाई की जरूरत है। 4. सॉफ्टवेयर में ईआरओ के कानूनी अधिकार लागू हों CEO का कहना है कि ECINet की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे कानून के तहत ERO को मिले अधिकार सॉफ्टवेयर के विकल्पों के कारण सीमित न हों। क्या है ‘तार्किक गड़बड़ी’ SIR में मौजूदा मतदाता सूची की जानकारी का पिछली SIR की सूची से मिलान किया जाता है। इसमें नाम या सरनेम में अंतर, माता-पिता की जानकारी में बदलाव या उम्र से जुड़ी गड़बड़ी मिलने पर रिकॉर्ड को ‘तार्किक गड़बड़ी’ के तौर पर चिन्हित किया जा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति मतदाता नहीं है। आयोग ने अब क्या बदलाव किया चुनाव आयोग ने 27 सितंबर को नोटिस पाने वाले ऐसे मतदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान की। अब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर दस्तावेज ले सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं। ऐसे मतदाताओं को सामान्य तौर पर ERO या AERO के कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। सुनवाई केवल विशेष परिस्थितियों में ERO के फैसले के आधार पर होगी और संभव हो तो ऑनलाइन की जाएगी। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपनी जगह किसी वयस्क परिवार के सदस्य को भी सुनवाई में भेज सकता है। ECINet की समीक्षा के लिए समिति बनेगी चुनाव आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का भी फैसला किया है। इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त करेंगे और इसमें आईआईटी या आईआईआईटी के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा। समिति यह देखेगी कि ECINet संबंधित कानूनों और नियमों के मुताबिक काम कर रहा है या नहीं। महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में क्या हुआ महाराष्ट्र की 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में पहले की सूची के मुकाबले 21.1% मतदाता कम थे। हालांकि, चुनाव आयोग के मुताबिक ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होना अंतिम रूप से नाम हटना नहीं है। ऐसे मतदाता दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा अब 12 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है और उनके निपटारे की समयसीमा 10 नवंबर तक है।