एनजीटी ने कहा कि नदी में दूध अर्पित करने पर कानूनी रोक नहीं है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए भविष्य में बड़े धार्मिक आयोजनों की निगरानी जरूरी होगी।