धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर शुरू हुए मौजूदा विवाद ने सवाल खड़ा कर दिया है कि मोदी युग के चारों शिक्षा मंत्रियों की भूमिका और विरासत को किस नज़रिए से देखा जाए.