सवाल- मेरी उम्र 27 साल है। मेरा बॉयफ्रेंड और मैं करीब 6 महीने से साथ हैं। वह अपने पुराने रिलेशनशिप के बारे में खुलकर बात कर लेता है। कभी-कभी दोस्तों के बीच पुराने कॉलेज के दिनों की बातें बताता है, जिसमें उसकी एक्स का जिक्र भी आ जाता है। वह इसे बिल्कुल सामान्य तरीके से कहता है, लेकिन पता नहीं क्यों, मुझे बहुत बुरा लगता है। उसके बाद मेरा मूड खराब हो जाता है और मैं उससे दूरी बनाने लगती हूं। मुझे पता है कि ये उसका पास्ट है और मैं उसका प्रेजेंट हूं। पास्ट को बदल नहीं सकते, फिर भी मैं उसे स्वीकार नहीं कर पा रही हूं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- आपकी परेशानी बहुत सामान्य है। बहुत से लोग अपने पार्टनर के अतीत के बारे में सुनकर असहज महसूस करते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आप असुरक्षित, पजेसिव या गलत हैं। अक्सर ऐसी स्थिति में असली समस्या पार्टनर का पास्ट नहीं, बल्कि उस पास्ट से जुड़ी हमारी अपनी भावनाएं होती हैं। रिट्रोएक्टिव जेलसी जब आपका बॉयफ्रेंड अपनी एक्स का जिक्र करता है, तब आपके मन में अनजाने में कुछ सवाल उठ सकते हैं- ये विचार कुछ सेकंड में आते हैं और हमारे मूड को प्रभावित कर देते हैं। मनोविज्ञान में इसे ‘रिट्रोएक्टिव जेलसी’ यानी पार्टनर के अतीत से जुड़ी ईर्ष्या या असुरक्षा। ‘रिट्रोएक्टिव जेलसी’ का पार्टनर के वर्तमान व्यवहार से कोई लेना–देना नहीं है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इस भावना को समझा और संभाला जा सकता है। हर इंसान का है एक अतीत किसी भी रिश्ते में यह स्वीकार करना जरूरी है कि आपका पार्टनर आपसे मिलने से पहले भी एक पूरी जिंदगी जी चुका है। उसके दोस्त रहे होंगे, यादें रही होंगी, कुछ अच्छे-बुरे अनुभव रहे होंगे और शायद कुछ पुराने रिश्ते भी। ये सभी अनुभव मिलकर उसे वह इंसान बनाते हैं, जिससे आज आप प्यार करती हैं। इसलिए असली सवाल ये नहीं है कि उसके पास्ट में क्या था। असली सवाल ये है कि- जब हम किसी के अतीत को मिटाने की कोशिश छोड़कर उसके वर्तमान को देखने लगते हैं, तब रिश्ते में ज्यादा भरोसा और सहजता महसूस होती है। अतीत कब बन जाता है समस्या अतीत समस्या तभी बनता है, जब इंसान उससे पूरी तरह बाहर न निकल पाया हो और उसका एक पांव वहीं पर अटका हो। नीचे ग्राफिक में देखिए कि किसी व्यक्ति का अतीत उसके वर्तमान रिश्ते के लिए कब समस्या बन सकता है- असली समस्या क्या है? सबसे पहले यह समझें कि आपको वास्तव में किस बात से तकलीफ हो रही है? कई बार हम सोचते हैं कि समस्या ‘एक्स का जिक्र’ है, जबकि असली समस्या कुछ और होती है। इसलिए आपको खुद से कुछ सवाल पूछने की जरूरत है, जैसेकि- खुद से ये सवाल पूछना इसलिए जरूरी है क्योंकि तभी आप सही कदम उठा सकती हैं। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि मन में आ रहे इन विचारों को कैसे हैंडल करें। मनोवैज्ञानिक टूल-1 थॉट चेकिंग (अपने विचारों को परखना) जब भी एक्स का जिक्र सुनकर मूड खराब हो तो अपने मन में चल रहे विचार को पकड़ने की कोशिश करें। एक उदाहरण घटना: उसने कॉलेज की एक कहानी सुनाई, जिसमें एक्स का जिक्र था। तुरंत आया विचार: "क्या वह अभी भी उसे याद करता है।" अब खुद से पूछें: अक्सर पता चलता है कि वह केवल अपने जीवन का एक पुराना अनुभव साझा कर रहा था, न कि किसी पुराने रिश्ते को दोबारा जी रहा था। मनोवैज्ञानिक टूल-2 कंपैरिजन न करने की टेकनीक जब भी हम किसी दूसरे से अपनी तुलना करते हैं तो हमारा आत्मविश्वास कमजोर ही होता है। इसलिए ये बात हमेशा याद रखें– जब भी आपके मन में कंपैरिजन शुरू हो तो तुरंत खुद को याद दिलाएं और खुद से कहें- मैं उसकी एक्स से कोई मुकाबला नहीं कर रही हूं। वो उसका पास्ट थी, मैं प्रेजेंट हूं। दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं।" मनोवैज्ञानिक टूल-3 अपनी भावनाओं को नाम दें साइकोलॉजी पर हुई तमाम रिसर्च बताती हैं कि जब भी हम अपनी भावनाओं को सही नाम देते हैं, तो उसका असर कम होता है। नाम देने का अर्थ है, उसे ठीक से आइडेंटीफाई करना, कनफ्यूजन दूर करना। इसलिए अपनी फीलिंग्स को ठीक–ठीक पहचानने की कोशिश करिए और उसे नाम दीजिए। जैसेकि- मनोवैज्ञानिक टूल-4 ‘मैं’ वाले वाक्यों का इस्तेमाल अगर यह बात आपको लगातार परेशान कर रही है, तो पार्टनर से इस बारे में बात करना जरूरी है। लेकिन बात करते वक्त आपकी भाषा क्या हो, यह समझना भी महत्वपूर्ण है। आरोप लगाने वाले वाक्य न बोलें। सिर्फ अपनी फीलिंग्स बताएं। जैसेकि- ऐसे न कहें: "तुम हमेशा अपनी एक्स की बातें करते रहते हो।" ऐसे कहें: "जब पुराने रिश्ते की बातें बार-बार आती हैं, तो मुझे थोड़ी असहजता महसूस होती है। मैं समझती हूं कि यह तुम्हारा अतीत है, लेकिन कभी-कभी मुझे कंपैरिजन का डर लगता है।" जब हम आरोप नहीं लगाते और सिर्फ अपनी भावनाएं शेयर करते हैं तो सामने वाला व्यक्ति डिफेंसिव नहीं होता। वो आपकी भावना को समझने की कोशिश करता है। मनोवैज्ञानिक टूल-5 प्रेजेंट में रहना, जीना, सोचना जब दिमाग बार-बार अतीत में जाने लगे, तो खुद से ये तीन सवाल पूछिए: अंतिम बात हर इंसान अपने अनुभवों का जोड़ होता है। आपके पार्टनर का अतीत भी उसकी कहानी का हिस्सा है। महत्वपूर्ण यह नहीं कि आपसे पहले वह किसके साथ था। महत्वपूर्ण यह है कि आज वह किसके साथ रहना चुन रहा है। रिश्ते तब मजबूत होते हैं, जब हम अतीत से लड़ने की बजाय वर्तमान में भरोसा करना सीखते हैं। ………………………………… ये खबर भी पढ़ें… रिलेशनशिप एडवाइज- बेस्ट फ्रेंड से प्यार करने लगी हूं:डर है, दिल की बात बताने से दोस्ती न टूट जाए, क्या करूं, उसे कहूं या नहीं आपको अपने बेस्ट फ्रेंड से प्यार हो गया है। इसमें कुछ भी अजीब या अस्वाभाविक नहीं है। जिसके साथ हम सबसे ज्यादा वक्त गुजारते हैं, जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, जिसे अपने दिल की हर बात बताते हैं, उसके लिए मन में रोमांटिक भावनाएं भी विकसित हो जाना बहुत स्वाभाविक है। पूरी खबर पढ़ें…