पहली बार ईरान ने यह दिखाया है कि उसके ऊपर किए गए किसी भी हमले की कीमत सिर्फ़ उसे ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी तुरंत चुकानी पड़ सकती है.