प्रारंभिक जांच और शिकायतों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। आरोप है कि समिति कर्मचारियों, प्रबंधकों और तत्कालीन पदाधिकारियों की मिलीभगत से किसानों के नाम पर फर्जी ऋण स्वीकृत कर राशि का गबन किया गया।