न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है तथा लोकतंत्र की आत्मा संवाद और असहमति में निहित है।