Birth Weight And Adult Health: क्या जन्म के समय आपका वजन भी था कम? रिसर्च का ये 'स्ट्रोक' कनेक्शन उड़ा देगा होश

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Does Low Birth Weight Increase Stroke Risk In Adults: कम जन्म वजन को अक्सर लोग जन्म के समय की एक साधारण जानकारी मानकर भूल जाते हैं. लेकिन पिछले दो दशकों में रिसर्चर ने इस पर फिर से ध्यान देना शुरू किया है. सवाल यह है कि क्या जन्म के समय का वजन आगे चलकर वयस्क जीवन में स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन लोगों में भी जो बाहर से बिल्कुल स्वस्थ दिखते हैं? इसका जवाब सीधा नहीं है, लेकिन लगातार मिल रहे संकेत बताते हैं कि कम जन्म वजन भविष्य में स्ट्रोक के खतरे को थोड़ा बढ़ा सकता है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट?डॉ मुरली चेकुरी ने TOI को बताया कि कम जन्म वजन को सिर्फ शिशु अवस्था तक सीमित समस्या मानना सही नहीं है. गर्भ में जब शिशु को सीमित पोषण या ऑक्सीजन मिलती है, तो उसका शरीर खुद को उस माहौल के हिसाब से ढाल लेता है. यह बदलाव बाद में पूरी तरह ठीक नहीं होते. इसी को स्वास्थ्य और डेवलपमेंट ऑफ ऑर्गन डिजीज उत्पत्ति का सिद्धांत कहा जाता है, जिसके अनुसार गर्भ के दौरान की परिस्थितियां शरीर के अंगों और प्रणालियों के काम करने के तरीके को जीवनभर के लिए प्रभावित कर सकती हैं.क्या होते हैं बदलाव?डॉ मुरली चेकुरी बताते हैं कि ऐसे बच्चों में आगे चलकर हाईबीपी, मेटाबॉलिज्म और ब्लड वेसल्स के काम में सूक्ष्म बदलाव आ सकते हैं. समय के साथ यही बदलाव हाई बीपी, इंसुलिन प्रतिरोध और ब्लड वेसल्स से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं, जो स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारक हैं.स्टडी में क्या निकला?इस संबंध को समझने के लिए बड़े स्तर पर स्टडी भी किए गए हैं. स्वीडन में किए गए एक बड़े स्टडी में लगभग आठ लाख लोगों को शामिल किया गया. इसमें पाया गया कि जिन लोगों का जन्म वजन औसत 3.5 किलोग्राम से कम था, उनमें स्ट्रोक का खतरा 21 प्रतिशत अधिक था. पुरुषों में यह जोखिम 23 प्रतिशत और महिलाओं में 18 प्रतिशत तक देखा गया, इसके साथ ही यह भी पाया गया कि जन्म वजन में हर एक स्तर की कमी के साथ स्ट्रोक का खतरा करीब 11 प्रतिशत बढ़ता है.इसे भी पढ़ें- Metabolic Diseases In India: भारत में तेजी से फैल रही हैं मेटाबॉलिक बीमारियां, कहीं आप भी तो नहीं इसके शिकार?डॉ इसे सरल तरीके से समझाते हैं.  उनके अनुसार, गर्भ में विकास के दौरान शरीर के महत्वपूर्ण अंग जीवित रहने के लिए खुद को ढाल लेते हैं. इससे ब्लड वेसल्स थोड़ी छोटी या कठोर हो सकती हैं, लीवर के काम करने के तरीके में बदलाव आ सकता है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित हो सकता है. ये बदलाव लंबे समय में शरीर को कमजोर बना सकते हैं.क्या सबको होती है दिक्कत?इसका मतलब यह नहीं है कि कम जन्म वजन वाले हर व्यक्ति को स्ट्रोक होगा. डॉ कहते हैं कि यह केवल जोखिम को थोड़ा बढ़ाता है, न कि निश्चित रूप से बीमारी तय करता है. एक्सपर्ट अगर इसके साथ धूम्रपान, हाई बीपी , ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं जुड़ जाएं, तभी खतरा ज्यादा बढ़ता है. इसलिए जरूरी है जागरूकता, न कि डर. नियमित रूप से रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच, सक्रिय लाइफस्टाइल, पर्याप्त नींद और तनाव कंट्रोल जैसे कदम इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, समय रहते सावधानी बरतना ही सबसे बेहतर तरीका है, ताकि भविष्य में होने वाले खतरे को टाला जा सके.इसे भी पढ़ें- Painkiller Side Effects: क्या पेन किलर से सच में खराब हो जाते हैं ऑर्गन, जानें किस मात्रा में सही रहता है इनका सेवन?Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.