वर्ष 2021 तक वह फसल की आमदनी से यश छाजेड़ को किस्तों में रकम देता रहा, लेकिन कभी कोई रसीद नहीं दी गई। रसीद मांगने पर आरोपित कहते थे कि रकम जमा कर ली गई है और केवल हस्ताक्षर करवा लेते थे।