कोर्ट ने माना कि इश्तहार छापने मात्र से एकतरफा डिक्री देकर किसी को बेघर नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल ने याचिका खारिज कर मामले की नए सिरे से सुनवाई का आदेश बरकरार रखा है।