मानसून की बेरुखी और कम वर्षा के चलते उज्जैन को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने की प्रक्रिया के बीच सिंहस्थ-2028 के लिए पर्याप्त पानी जुटाना और शिप्रा को स्वच्छ बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है।