दिवाली पर सैलरी, बोनस और बचत का बड़ा हिस्सा त्योहार की तैयारियों में खर्च हो जाता है। खरीदारी के दौरान छोटे-छोटे खर्च ज्यादा नहीं लगते, लेकिन त्योहार खत्म होते ही स्कूल फीस, राशन, बिजली बिल और EMI जैसे जरूरी भुगतान सामने आ जाते हैं। ऐसे में कई लोगों को महीने का बाकी खर्च चलाने के लिए क्रेडिट कार्ड या उधार का सहारा लेना पड़ता है। इस परेशानी से बचने के लिए दिवाली का बजट बनाते समय सिर्फ त्योहार के खर्चों पर नहीं, बल्कि अगले महीने की जरूरतों पर भी ध्यान देना जरूरी है। यानी खरीदारी के बाद इतनी रकम जरूर बची रहनी चाहिए, जिससे नवंबर के जरूरी खर्च बिना किसी आर्थिक दबाव के पूरे हो सकें। इसलिए आज 'जरूरत की खबर' में दिवाली पर बजट बनाने पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- जितेंद्र सोलंकी, फाइनेंशियल एडवाइजर, गाजियाबाद सवाल- दिवाली का बजट बनाने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन कैसे करें? जवाब- दिवाली का बजट तय करने के लिए पहले अपनी आय में से जरूरी खर्च, EMI और नवंबर के बिलों की रकम घटाएं। इसके बाद इमरजेंसी फंड और बचत के लिए पैसा अलग रखें। बाकी बची रकम में से ही दिवाली का बजट बनाएं। सवाल- सैलरी में से दिवाली पर कितना पैसा खर्च करना सुरक्षित है? जवाब- यह इस बात पर निर्भर करता है कि जरूरी खर्चों और किस्तों के बाद आपके पास कितनी रकम बचती है। इसलिए पहले अपनी खर्च करने की क्षमता का हिसाब लगाएं। मान लीजिए- लेकिन यह पूरी रकम खर्च करना जरूरी नहीं है। अगर ₹5,000 में त्योहार की जरूरतें पूरी हो जाती हैं, तो बाकी ₹2,000 बचाकर रखें। ध्यान रखें कि दिवाली के लिए बजट तय करते समय अगले महीने की सैलरी आने तक के जरूरी खर्चों से समझौता न करें। सवाल- नवंबर के जरूरी खर्चों के लिए पैसा पहले से कैसे अलग रखें? जवाब- इसके लिए पिछले महीने के बैंक स्टेटमेंट या UPI हिस्ट्री से नियमित खर्चों का हिसाब निकालें। हर बिल की देय तारीख भी लिखें। अगर अलग बैंक खाता नहीं है, तो मोबाइल के नोट्स में जरूरी भुगतानों की रकम दर्ज कर सकते हैं। सवाल- दिवाली के खर्च को अलग-अलग हिस्सों में बांटना क्यों जरूरी है? जवाब- दिवाली पर अक्सर बजट इसलिए बिगड़ता है, क्योंकि लोग खरीदारी करते समय हर चीज का खर्च अलग-अलग देखते हैं, कुल खर्च नहीं। घर की सजावट पर थोड़े ज्यादा पैसे खर्च करना या कुछ अतिरिक्त गिफ्ट खरीदना उस समय छोटी बात लग सकती है, लेकिन कई छोटे खर्च मिलकर बजट से बाहर ले जाते हैं। इसलिए कुल बजट को इन कैटेगरी में बांटें- इससे पहले से पता रहेगा कि किस मद पर कितना खर्च करना है और कहां कटौती की जा सकती है। उदाहरण के लिए, अगर सजावट पर तय रकम खर्च हो चुकी है, तो नई चीजें खरीदने के बजाय पुराने सामान का दोबारा इस्तेमाल करें। इससे दूसरी जरूरतों के लिए पैसा बचेगा और कुल बजट भी नहीं बिगड़ेगा। सवाल- दिवाली पर मेहमानों, रिश्तेदारों और पारिवारिक आयोजनों का बजट कैसे बनाएं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- मेहमानों और रिश्तेदारों के लिए पारिवारिक आयोजनों के लिए सवाल- दिवाली के दौरान अचानक होने वाले खर्चों के लिए कितने पैसे बचाकर रखने चाहिए? जवाब- इसकी कोई तय रकम सभी परिवारों के लिए सही नहीं है। इसे अपनी आय, जरूरी खर्चों और उपलब्ध बचत के अनुसार तय करें। इस रकम का इस्तेमाल अतिरिक्त सजावट या ऑफर देखकर खरीदारी करने के लिए न करें। सवाल- अगर दिवाली का खर्च तय बजट से बढ़ने लगे तो क्या करें? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- उदाहरण के लिए, अगर सजावट और मेहमाननवाजी में ₹1,500 ज्यादा खर्च हो गए हैं, तो अगली गैर-जरूरी खरीदारी रोककर बजट संभालें। सवाल- दिवाली पर मिलने वाले बोनस का इस्तेमाल कैसे करें, ताकि बाद में पैसों की कमी न हो? जवाब- पैसे से दिवाली की खरीदारी या दूसरे खर्च पूरे कर सकते हैं। बोनस बांटते समय इन बातों का ध्यान रखें- अगर बोनस अभी नहीं मिला है, तो उसे पहले से तय दिवाली बजट में शामिल न करें। सवाल- दिवाली की खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड या EMI लेना कब जोखिम भरा हो सकता है? जवाब- क्रेडिट कार्ड, EMI और ‘बाय नाउ पे लेटर’ से भुगतान टल सकता है, लेकिन खर्च खत्म नहीं होता। त्योहार के बाद भी बिल और किस्तें चुकानी पड़ती हैं। खरीदारी से पहले ये बातें जांचें- हर खरीदारी को उसी दिन अपने बजट में दर्ज करें, भले ही भुगतान क्रेडिट कार्ड से किया हो। अगर पहले से कार्ड का बकाया है या पूरा बिल चुकाने की क्षमता नहीं है, तो नई गैर-जरूरी खरीदारी रोकना बेहतर है। सवाल- दिवाली के बाद पैसे कम पड़ जाएं तो नवंबर का बजट कैसे संभालें? जवाब- बाहर खाने, मनोरंजन और गैर-जरूरी ऑनलाइन खरीदारी पर अस्थायी रोक लगाएं। ग्राफिक में सभी टिप्स देखिए- दिवाली का बजट इस आधार पर न बनाएं कि आप कितना खर्च करना चाहते हैं। इसे इस आधार पर बनाएं कि नवंबर के सभी जरूरी खर्च और भुगतान सुरक्षित रखने के बाद वास्तव में कितना पैसा खर्च कर सकते हैं। पहले घर चलाने के पैसे अलग रखें, फिर त्योहार का बजट तय करें। इससे दिवाली की खुशियां नवंबर की आर्थिक परेशानी नहीं बनेंगी। ***************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- सोते समय मुंह से निकलती है लार: डॉक्टर से समझें, यह कब नॉर्मल है, कब किसी बीमारी का संकेत, बचाव के 11 उपाय जब हम सो रहे होते हैं, तब भी हमारे शरीर के भीतर कई जरूरी काम लगातार चलते रहते हैं। सलाइवा यानी लार बनना भी इनमें से एक है। यह हमारे शरीर का एक जरूरी फ्लुइड है, जो मुंह को नम रखने, खाना चबाने और निगलने के साथ पाचन की प्रक्रिया में भी मदद करता है। पूरी खबर पढ़िए…