किसानों का कहना है कि वे महीनों की मेहनत, खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर खर्च करने के बाद फसल मंडी में बेचने पहुंच रहे हैं, लेकिन यहां लागत निकालना भी मुश्किल।