बदलते ट्रेंड्स और सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते 'फास्ट फैशन' का चलन तेजी से बढ़ा है, जिसमें कम कीमत पर अत्यधिक मात्रा में ट्रेंडी कपड़े तैयार किए जाते हैं। हालांकि, इन सस्ते कपड़ों की असली कीमत पर्यावरण को चुकानी पड़ती है।