आजकल बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता तनाव, काम का दबाव और लगातार बनी रहने वाली मानसिक परेशानियों के बीच कई लोग खुद को राहत देने के लिए नशे का सहारा लेने लगते हैं. शुरुआत में यह कुछ समय के लिए तनाव या थकान कम करने का आसान रास्ता लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर शरीर और दिमाग दोनों पर पड़ने लगता है. शराब, निकोटीन, ओपिओइड, कैनाबिस और दूसरे नशीले पदार्थ शरीर पर अलग-अलग तरीके से असर करते हैं.जब कोई नशीला पदार्थ शरीर में जाता है, तो वह रक्त के जरिए अलग-अलग अंगों तक पहुंचता है. कई पदार्थ दिमाग तक भी पहुंचते हैं और वहां न्यूरोट्रांसमीटर के सामान्य काम करने के तरीके को बदल देते हैं. इसी वजह से व्यक्ति को कुछ समय के लिए उत्साह, आराम, सुस्ती या अलग तरह की मानसिक अवस्था महसूस होती है.शरीर में जाकर पहला कामयह नशीले पदार्थ पर निर्भर करता है. हर ड्रग शरीर में एक जैसा पहला काम नहीं करता. कुछ पदार्थ दिमाग में डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि बढ़ाते हैं, जबकि कुछ मस्तिष्क के दूसरे रिसेप्टर्स पर असर डालते हैं. नशे से मिलने वाला तेज रिवॉर्ड दिमाग को यह सिखा सकता है कि इस पदार्थ का सेवन दोबारा करना चाहिए. यही वजह है कि नशा सिर्फ इच्छाशक्ति का मामला नहीं रह जाता, बल्कि बार-बार सेवन के साथ दिमाग में बदलाव भी आने लगते हैं.शरीर नशे का आदी हो जाता हैजब कोई व्यक्ति बार-बार नशीले पदार्थ का सेवन करता है, तो दिमाग उस लगातार बदलती रासायनिक स्थिति के अनुसार खुद को ढालने लगता है. दिमाग को बार-बार एक तेज रिवॉर्ड सिग्नल मिलता है, तो वह धीरे-धीरे उसके प्रति अपनी प्रतिक्रिया बदलने लगता है. इसके बाद पहले जैसी अनुभूति पाने के लिए व्यक्ति को ज्यादा मात्रा या ज्यादा बार सेवन करने की इच्छा होती है. इसे टॉलरेंस कहा जाता है. कुछ मामलों में पदार्थ बंद करने पर बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, पसीना, कंपकंपी या अन्य लक्षण भी हो सकते हैं.यह भी पढ़ें: वर्क फ्रॉम होम करने से बढ़ रहा है पेट? अपनाएं ये एक्सरसाइजनशा इन अंगों को भी पहुंचाता है नुकसाननशे का असर केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता. अलग-अलग पदार्थ हृदय, फेफड़े, लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं. लंबे समय तक शराब का अधिक सेवन लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं धूम्रपान और तंबाकू फेफड़ों तथा हार्ट के लिए बड़ा खतरा हैं. कुछ नशीले पदार्थ सांस लेने की क्षमता को दबा सकते हैं, जिससे ओवरडोज की स्थिति में जान जाने का खतरा रहता है. इसके अलावा नशे की आदत व्यक्ति की नींद, याददाश्त, एकाग्रता, काम करने की क्षमता और रिश्तों को भी प्रभावित करती है.बदलाव पर दें ध्यानखतरा केवल तब नहीं होता जब व्यक्ति बहुत ज्यादा नशा करने लगे. समस्या तब भी शुरू हो सकती है जब नशीले पदार्थ का इस्तेमाल धीरे-धीरे आदत और फिर निर्भरता में बदलने लगे. अगर किसी व्यक्ति को बार-बार नशे की जरूरत महसूस हो, सेवन कम करने में परेशानी हो या नशे की वजह से काम, पढ़ाई, परिवार और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो यह मदद लेने का संकेत है. नशे से बाहर निकलना संभव है और इसके लिए डॉक्टर या addiction-treatment विशेषज्ञ की मदद लेना एक सही कदम है.Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेंयह भी पढ़ें: रह-रहकर आ रही खांसी, कहीं पॉल्यूशन का शिकार तो नहीं हो गए आप?