दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्र संघ चुनाव करवाने को तैयार हो गया है। जामिया प्रशासन ने 29 अक्टूबर को एक नया ऑर्डर जारी किया है, जिसमें पहली बार टाइम-बाउंड डेडलाइन दी गई है। प्रशासन के मुताबिक, 16 जुलाई से एकडेमिक सेशन शुरू होगा। इसके के 6 हफ्तों के भीतर स्टूडेंट्स यूनियन के चुनाव कराए जाएंगे। संविधान पूरा करने की अंतिम तारीख 15 मई 2027 है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने स्टूडेंट्स यूनियन के संविधान को तय समयसीमा में पूरा करने को कहा है। प्रशासन ने कहा है कि 2 नवंबर से ऑफलाइन क्लासेज फिर शुरू होंगी। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान छात्रों पर जो शो-कॉज नोटिस, सस्पेंशन, रस्टिकेशन और कैंपस बैन लगाए गए थे, वे सब वापस लिए जाएंगे। इससे पहले 26 अक्टूबर को प्रशासन ने कहा था कि संविधान अप्रूव होने के 15 दिन बाद चुनाव होगा, लेकिन इसकी तारीख नहीं दी थी, इसलिए छात्र हड़ताल खत्म करने राजी नहीं हुए थे। यूनिवर्सिटी में जश्न की तस्वीर… 18 दिन की भूख हड़ताल खत्म छात्र संघ चुनाव की मांग को लेकर 5 छात्र भूख हड़ताल कर रहे थे। हड़ताल कर रहे एबिन बेसिल 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर थे। बेसिल के मुताबिक, प्रशासन ने सभी मांगें मान ली हैं इसलिए वो अपनी हड़ताल खत्म कर रहा है। 17वें दिन तक उसका 7.1 किलो वजन कम हो चुका था, तबीयत काफी खराब हो रही थी। बेसिल के अलावा, रेहान खान, रितिक, अल्ताफ और अबूजर भी भूख हड़ताल कर रहे थे। यूनिवर्सिटी की सभी क्लासेस रेगुलर होंगी रजिस्ट्रार महताब आलम ने छात्रों से कहा कि हम बहुत जल्द कक्षाएं शुरू करने जा रहे हैं। जो छात्र अपने घर गए हुए हैं, उनके वापस लौटते ही हम दीपावली के बाद से ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने का प्रयास करेंगे। इसलिए, जो छात्र अभी बाहर गए हुए हैं, उनसे कहिए कि वे 8 नवंबर तक वापस आ जाएं, ताकि इसके बाद ऑफलाइन कक्षाएं शुरू की जा सकें। 2006 में आखिरी बार हुए थे छात्र संघ चुनाव जामिया में आखिरी छात्रसंघ चुनाव 2006 में हुआ था। 2006 में इसे भंग कर दिया गया था। छात्र लिंगदोह कमेटी के नियमों के तहत चुनाव की मांग कर रहे थे। 2006 में बंद होने की मुख्य वजह कैंपस हिंसा बताई गई थी। 2005 में आखिरी चुनाव हुए थे, तब शम्स परवेज अध्यक्ष बने थे। वीसी मुशीरुल हसन थे, जिन्होंने 1996 से बंद पड़े चुनावों को 2005 में फिर शुरू करवाया था। 31 मार्च 2006 में प्रशासन ने JMISU को भंग कर दिया। यूनियन भंग किए जाने के आधिकारिक कारण 3 थे 20 साल तक क्यों नहीं हुआ प्रशासन ने JMI Act 1988 के स्टेट्यूट 27 का हवाला दिया, जिसमें सुरक्षा के लिए चुनाव रोकने का अधिकार है। 2012 में छात्र दिल्ली हाईकोर्ट गए। जामिया ने कहा माहौल ठीक नहीं। कोर्ट ने चुनाव कराने का आदेश नहीं दिया, पर रोक भी नहीं लगाई। 2017 में जामिया ने छात्र परिषद यानी हर क्लास से एक प्रतिनिधि का आइडिया दिया, छात्रों ने इसे अलोकतांत्रिक कहकर खारिज कर दिया। तब से सिर्फ डिपार्टमेंट की सब्जेक्ट एसाेसिएशन चल रही थीं, जिनमें डीन का वीटो होता था, केंद्रीय यूनियन नहीं थी।