स्वतंत्रता के बाद जब देश में नई प्रशासनिक व्यवस्था आकार ले रही थी, तब इंदौर केवल मालवा का प्रमुख शहर नहीं, बल्कि मध्य भारत की सत्ता का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी था।