पोलैंड में प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार पर देश की संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगा है। यह विवाद देश की सबसे बड़ी अदालतों में से एक संवैधानिक ट्रिब्यूनल को लेकर शुरू हुआ है। एक जज ने शुक्रवार को संवैधानिक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया। इसके बाद उन्होंने खुद ही अध्यक्ष की जिम्मेदारी ले ली। विपक्ष इससे नाराज हो गया। उसने सरकार पर तख्तापलट की कोशिश का आरोप लगाया। सैकड़ों लोग जज के फैसले के विरोध में अदालत के बाहर जमा हो गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर चीजें फेंकीं। हालात बिगड़ने पर राष्ट्रपति कारोल नावरोत्स्की सेनेगल जाते समय बीच रास्ते से ही वापस लौट आए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में राष्ट्रपति का देश में रहना जरूरी है सबसे पहले समझिए, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री में झगड़ा क्यों है? 2015 में शुरू हुआ था अदालतों को लेकर विवाद इस झगड़े की शुरुआत 2015 में हुई थी। उस समय पोलैंड में लॉ एंड जस्टिस (PiS) पार्टी की सरकार बनी थी। उसने अदालतों और न्यायिक संस्थाओं में कई बदलाव किए थे। जैसे- 1. सुप्रीम कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र 70 से घटाकरक 65 करना 2. अदालतों के प्रमुखों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका बढ़ाना 3. जजों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग व्यवस्था बनाना विपक्ष और यूरोपीय संघ (EU) ने इन बदलावों का विरोध किया था। उनका आरोप था कि सरकार अदालतों पर अपना नियंत्रण बढ़ा रही है। इससे जजों के स्वतंत्र होकर फैसले लेने की क्षमता कमजोर हो रही है। 2023 में डोनाल्ड टस्क की गठबंधन सरकार सत्ता में आई। उसने चुनाव के दौरान वादा किया था कि अदालतों को राजनीतिक दखल से मुक्त कराया जाएगा और कानून का राज बहाल होगा। सरकार बदलने के बाद भी अदालतों की व्यवस्था तुरंत नहीं बदली। पिछली सरकार के समय नियुक्त किए गए कई जज अब भी अहम पदों पर थे। टस्क सरकार इन्हीं नियुक्तियों और नियमों में बदलाव करना चाहती थी। राष्ट्रपति नावरोत्स्की और PiS इसका विरोध कर रहे थे। 6 नए जजों की नियुक्ति से कैसे बढ़ा विवाद? इस साल मार्च में पोलैंड की संसद ने संवैधानिक ट्रिब्यूनल के लिए 6 नए जज चुने। लेकिन राष्ट्रपति नावरोत्स्की ने इनमें से केवल 2 जजों को अपने सामने शपथ दिलाई। बाकी 4 जजों को शपथ दिलाने से इनकार कर दिया। इसके बाद 9 अप्रैल को इन चारों जजों ने संसद में ही शपथ ले ली और राष्ट्रपति कार्यालय को इसकी जानकारी दे दी। इनमें अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का भी शामिल थीं। राष्ट्रपति कार्यालय ने संसद में ली गई इस शपथ को मान्यता नहीं दी। संवैधानिक ट्रिब्यूनल के प्रमुख बोगदान श्विएंत्सकोव्स्की ने भी इन चारों जजों को अदालत में काम करने की अनुमति नहीं दी। इससे विवाद और बढ़ गया। टस्क सरकार का कहना था कि संसद से चुने गए जजों को काम करने से रोकना गलत है। दूसरी तरफ, राष्ट्रपति और PiS का कहना था कि जजों की नियुक्ति में संविधान के नियमों का पालन होना चाहिए। जज ने ट्रिब्यूनल के प्रमुख और उपप्रमुख को क्यों निलंबित किया? अब सवाल है कि शुक्रवार को ऐसा क्या हुआ कि एक जज ने अदालत के दो बड़े अधिकारियों को ही निलंबित कर दिया? दरअसल, संवैधानिक ट्रिब्यूनल के प्रमुख बोगदान श्विएंत्सकोव्स्की लगातार उन चार नए जजों को काम करने की अनुमति नहीं दे रहे थे, जिन्हें राष्ट्रपति ने शपथ नहीं दिलाई थी। इनमें अन्ना कोर्विन-पियोत्रोव्स्का भी शामिल थीं। शुक्रवार को अन्ना ने श्विएंत्सकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्तलोमिए सोचान्स्की को एक महीने के लिए निलंबित करने का आदेश दिया। उनका आरोप था कि नए जजों को काम नहीं करने देने से अदालत का कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अदालत का काम सामान्य तरीके से चलाने के लिए यह कदम जरूरी है। इसके बाद अन्ना ने खुद ट्रिब्यूनल की जिम्मेदारी संभालने की घोषणा कर दी। लेकिन इस फैसले को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष का कहना है कि अन्ना को ट्रिब्यूनल का नेतृत्व करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि राष्ट्रपति ने उन्हें जज के तौर पर शपथ नहीं दिलाई थी। टस्क बोले- कानून का राज बहाल करना हमारी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने अपनी सरकार के फैसलों का बचाव किया है। उन्होंने X पर लिखा, 'PiS के शासन में सालों तक कानून का उल्लंघन हुआ। अब कानून का राज बहाल करना एक मुश्किल प्रक्रिया है। इसमें कभी-कभी कड़े और दर्दनाक फैसले लेने पड़ते हैं, लेकिन इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।' टस्क का कहना है कि पिछली सरकार के दौरान अदालतों की स्वतंत्रता कमजोर हुई थी। उनकी सरकार उसी व्यवस्था को ठीक करने की कोशिश कर रही है। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… G20 देशों के विदेश मंत्रियों का फोटो सेशन रद्द: यूरोपीय देशों का रूसी विदेश मंत्री के साथ फोटो खिंचवाने से इनकार; यूक्रेन जंग को लेकर विरोध अमेरिका में हो रही G20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शुक्रवार को रूस को लेकर विवाद हो गया। पहले दिन की बैठक का ग्रुप फोटो सेशन रद्द करना पड़ा। पूरी खबर पढ़ें…