जरूरत की खबर- वाहन बीमा के नियमों में बदलाव:एक्सपर्ट से जानें जेब पर पड़ेगा कितना असर, नए इंश्योरेंस रूल्स के फायदे-नुकसान

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अगर नई कार या बाइक खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नए चार पहिया वाहनों के लिए 4 साल और नए दोपहिया वाहनों के लिए 6 साल का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। पहली नजर में यह बदलाव सिर्फ बीमा से जुड़ा लग सकता है, लेकिन इसका असर जेब और फाइनेंशियल प्लानिंग दोनों पर पड़ सकता है। इससे वाहन खरीदने की कुल लागत बढ़ सकती है। साथ ही लंबे समय तक मिलने वाले बीमा कवर पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: लोकेश माथुर, नेशनल हेड-क्लेम, स्क्वायर इंश्योरेंस ब्रोकर, जयपुर सवाल- सुप्रीम कोर्ट ने वाहन बीमा को लेकर क्या आदेश दिया है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या होता है? जवाब- अगर आपके वाहन से किसी व्यक्ति, उसके वाहन या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी भरपाई बीमा कंपनी करती है। इसे थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कहते हैं। इसमें तीन पक्ष शामिल होते हैं, इसलिए इसे इसे थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कहा जाता है। उदाहरण के लिए- आपकी कार किसी बाइक से टकरा जाती है। इससे बाइक सवार घायल हो जाता है या उसकी बाइक को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में मुआवजा आपकी बीमा कंपनी देती है। हालांकि, इस बीमा में आपके अपने वाहन को हुए नुकसान का खर्च शामिल नहीं होता। इसके लिए अलग से कम्प्रेहेन्सिव इंश्योरेंस लेना पड़ता है। ‘मोटर वाहन अधिनियम’ के तहत भारत में सभी वाहनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। सवाल- क्या पुरानी गाड़ियों पर भी यह नियम लागू होगा? जवाब- नहीं, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सिर्फ नए वाहनों पर लागू होगा। पुरानी गाड़ियों के लिए फिलहाल मौजूदा बीमा नियम ही लागू रहेंगे और उन्हें वैध इंश्योरेंस बनाए रखना होगा। सवाल- कोर्ट के इस फैसले का कार और बाइक मालिकों पर क्या असर पड़ेगा? जवाब- इससे नई गाड़ी खरीदने वालों को लंबी अवधि का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेना होगा। इससे उनकी लागत, बीमा रिन्यूअल और पॉलिसी प्रबंधन से जुड़ी स्थिति में बदलाव आएगा। दोनों पर क्या असर पड़ेगा, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या इस फैसले से बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है? जवाब- हां, वाहन खरीदते समय बीमा पर एकमुश्त खर्च बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सालाना प्रीमियम बढ़ गया है। खर्च इसलिए बढ़ेगा क्योंकि बीमा की अवधि लंबी हो जाएगी और उसका प्रीमियम अग्रिम रूप से जमा करना होगा। सवाल- क्या इस फैसले के बाद नई कार और बाइक खरीदना महंगा हो सकता है? जवाब- हां, लेकिन यह बढ़ोतरी वाहन की बेस कीमत की वजह से नहीं होगी, बल्कि खरीद से जुड़े अनिवार्य खर्चों में बदलाव के कारण होगी। इसका वास्तविक असर वाहन के मॉडल, कीमत और इंश्योरेंस कैटेगरी के आधार पर अलग-अलग होगा। सवाल- क्या इस फैसले का असर सेकेंड-हैंड वाहनों के खरीदारों पर भी पड़ेगा? जवाब- सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश नए वाहनों के लिए है। हालांकि, सेकेंड-हैंड वाहन खरीदने वालों को यह जरूर चेक करना होगा कि वाहन का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस वैलिड है या नहीं। वाहन खरीदने के बाद बीमा पॉलिसी को नए मालिक के नाम ट्रांसफर कराना जरूरी है। अगर बीमा वैध नहीं है, तो वाहन का इस्तेमाल करने से पहले नया बीमा लेना पड़ सकता है। सवाल- लंबी अवधि का बीमा आपके फाइनेंशियल प्लान में कैसे मदद कर सकता है? जवाब- लंबी अवधि का बीमा भविष्य के एक जरूरी खर्च को पहले से तय कर देता है। इससे वाहन मालिकों को कई साल तक बीमा प्रीमियम के लिए अलग से बजट नहीं बनाना पड़ता। साथ ही हर साल प्रीमियम दरों में संभावित बदलाव का असर भी तुरंत नहीं पड़ता। इससे फाइनेंशियल गोल्स बनाना आसान हो सकता है। सवाल- 5 साल तक हर साल बीमा रिन्यू कराने और एक बार लंबी अवधि की पॉलिसी लेने में क्या फर्क है? जवाब- हर साल बीमा रिन्यू कराने पर शुरुआत में कम पैसे खर्च होते हैं, लेकिन भविष्य में प्रीमियम बढ़ने की चिंता बनी रहती है। वहीं, लंबी अवधि की पॉलिसी में शुरुआत में ज्यादा पैसा देना पड़ सकता है, लेकिन कई साल तक बीमा रिन्यू कराने की चिंता नहीं रहती। ग्राफिक में दोनों के बीच का फर्क देखिए- सवाल- अगर वाहन का बीमा लैप्स हो जाए तो क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- इसे पाॅइंटर्स से समझिए- सवाल- बीमा की वैधता कैसे चेक करें? जवाब- समय-समय पर पॉलिसी की वैधता जांचते रहने से बीमा लैप्स होने का रिस्क कम रहता है। खासतौर पर लंबी यात्रा पर जाने, वाहन खरीदने-बेचने या बीमा एक्सपायर होने की तारीख न याद होने पर यह जानकारी जरूर चेक कर लेनी चाहिए। डिटेल ग्राफिक में देखिए- सवाल- बिना बीमा वाहन चलाना कितना महंगा पड़ सकता है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- वाहन बीमा में नो-क्लेम बोनस (NCB) क्या होता है? जवाब- नो-क्लेम बोनस (NCB) वाहन बीमा में मिलने वाली एक छूट है। अगर आप पॉलिसी अवधि के दौरान कोई बीमा क्लेम नहीं करते हैं, तो बीमा कंपनी रिन्यूअल के समय प्रीमियम के ओन-डैमेज (OD) हिस्से पर छूट देती है। यह छूट आमतौर पर 20% से शुरू होती है और लगातार 5 साल तक क्लेम न करने पर 50% तक पहुंच सकती है। ध्यान रखें कि अगर आपने पॉलिसी अवधि में क्लेम लिया है, तो आमतौर पर NCB का लाभ अगले रिन्यूअल पर समाप्त हो जाता है। वहीं, पॉलिसी खत्म होने के बाद भी NCB का लाभ 90 दिनों तक सुरक्षित रहता है। यदि इस अवधि में पॉलिसी रिन्यू नहीं कराई जाती, तो यह छूट खत्म हो सकती है। सवाल- वाहन बीमा लेते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए? जवाब- पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझना जरूरी है कि उसमें क्या कवर हो रहा है और क्या नहीं। इसके अलावा, बीमा कंपनियां कई तरह के एड-ऑन कवर भी देती हैं, जो अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं। हालांकि, हर कंपनी के एड-ऑन कवर की शर्तें और सुविधाएं अलग हो सकती हैं। इसलिए कोई भी अतिरिक्त कवर लेने से पहले उसकी शर्तें जरूर पढ़नी चाहिए। सभी जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- नई कार या बाइक खरीदते समय अब सिर्फ डाउन पेमेंट, EMI और माइलेज पर ध्यान देना काफी नहीं है। बीमा से जुड़े नियमों में हो रहे बदलावों को समझना भी उतना ही जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी कानूनी या वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े। ********************** ग्राफिक्स- अंकुर बंसल …………………… ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- बारिश में बढ़ता ऑटो-कैब बुकिंग स्कैम:बुक करते हुए 11 सावधानियां बरतें, पेमेंट करते हुए 6 बातें ध्यान रखें बारिश हो रही हो, ऑफिस पहुंचने की जल्दी हो और सड़क पर कोई ऑटो या रिक्शा न दिखे, तो ज्यादातर लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे मोबाइल निकालकर कैब बुक कर लेते हैं। उस समय बस यही चिंता होती है कि किसी तरह जल्दी गाड़ी मिल जाए। पूरी खबर पढ़ें…