बारिश की बूंदों से कैसे बन सकती है बिजली? जानें नई तकनीक का दावा

Wait 5 sec.

अब तक सोलर एनर्जी का नाम सुनते ही धूप और सोलर पैनल का ख्याल आता था, लेकिन वैज्ञानिक अब बारिश को भी बिजली बनाने के एक सोर्स के तौर पर देख रहे हैं. स्पेन के सेविले में रिसर्चर्स ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें बारिश की बूंदों की स्पीड से बिजली पैदा करने की कोशिश की गई है. इसके लिए सोलर पैनल की सतह पर सिर्फ 100 नैनोमीटर पतली एक विशेष कोटिंग का इस्तेमाल किया गया है.रिसर्चर्स के मुताबिक, यह सिस्टम धूप और बारिश दोनों से एनर्जी हासिल करने की दिशा में काम करता है. हालांकि फिलहाल इसके नतीजे लैब टेस्ट तक सीमित हैं और असली सोलर पैनलों पर इसका परीक्षण होना बाकी है. बारिश की बूंदों से कैसे बन सकती है बिजली? इस तकनीक के पीछे Triboelectric Effect काम करता है. जब दो सतहें आपस में टकराकर अलग होती हैं तो उनके बीच इलेक्ट्रिक चार्ज का आदान-प्रदान होता है. इसी का इस्तेमाल बारिश की बूंदों के साथ किया गया है.  जब बारिश की बूंद विशेष रूप से तैयार की गई फ्लोरीनेटेड सतह पर गिरती है और फिर उस पर फिसलती है, तो पानी और सतह पर अलग-अलग इलेक्ट्रिक चार्ज पैदा होते हैं. बूंद के सिर्फ सतह पर पड़े रहने से बिजली नहीं बनती है. चार्ज तब पैदा होता है जब बूंद सतह पर आगे बढ़ती है, जिससे सर्किट में करंट पैदा हो सकता है. 100 नैनोमीटर की कोटिंग है खासरिसर्चर्स ने 100 नैनोमीटर मोटी फ्लोरीनेटेड पॉलीमर कोटिंग तैयार की है. यह 90 फीसदी से ज्यादा ट्रांसपेरेंट है, इसलिए बारिश न होने पर सोलर सेल तक धूप पहुंचने में बड़ी रुकावट नहीं आती है. टेस्टिंग में एक बारिश की बूंद से 110 वोल्ट तक का पीक वोल्टेज पैदा होने की बात सामने आई है. ऐसे में बारिश के दौरान सोलर पैनल अपनी सामान्य सोलर पावर के साथ बारिश की बूंदों से अतिरिक्त इलेक्ट्रिकल आउटपुट हासिल करने की कोशिश कर सकता है. यह भी पढ़ें - Redmi vs OnePlus vs Realme: जानें फीचर्स से लेकर कीमत तक, कौन सा टैबलेट बेस्ट?Perovskite Solar Cells के साथ इस्तेमालइस तकनीक को Halide Perovskite सोलर सेल्स के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. ये सेल ज्यादा रोशनी सोखने और हाई एफेसियंसी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इन सोलर सेल्स की एक बड़ी कमी यह है कि नमी से ये जल्दी प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में यह खास कोटिंग दो काम एक साथ कर सकती है. एक तरफ यह Perovskite सेल को पानी से बचाने में मदद करती है, वहीं दूसरी तरफ बारिश की बूंदों से एनर्जी हासिल करने का रास्ता भी देती है. कहां आ सकती है काम?इस तकनीक से फिलहाल इतनी बिजली पैदा होने की उम्मीद नहीं है कि पूरे घर के डिवाइस चलाए जा सकें, लेकिन इसका इस्तेमाल रिमोट सेंसर, वेदर मॉनिटरिंग स्टेशन, हाईवे साइनेज और छोटी ऑक्सिलरी लाइट्स जैसी चीजों को पावर देने में किया जा सकता है. हालांकि अभी यह तकनीक लैब में ही टेस्ट हुई है. यह भी पढ़ें - Apple से IFA तक बड़े लॉन्च और AI इवेंट्स, जानें सितंबर में क्या-क्या होगा खास?