यह दिवालियापन से जुड़ा केस है, जिसमें 22,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की वसूली का मामला है. एनसीएलटी ने अब कहा है कि दो सदस्यीय बेंच चूंकि बहुमत से फ़ैसले पर नहीं पहुँच पाया इसलिए यह क़दम उठाया गया है.