CJI सूर्यकांत ने कहा कि आर्थिक अपराधों का स्वरूप समय के साथ लगातार बदल रहा है। भारत में आर्थिक अपराधों से निपटने की आधुनिक व्यवस्था को किसी एक कानून तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता।