सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी मार्ग से आसपास के एक दर्जन गांवों के लोगों का आना-जाना लगा रहता है। सुबह-शाम स्कूली बच्चे भी इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। कई बार बच्चे और बुजुर्ग कुत्तों के झुंड को देखकर रास्ता बदलने को मजबूर हो जाते हैं।