बिस्तर पर पड़ी हुई 97 साल की लोकाडा दुआराह चल भी नहीं सकती थी. वहाँ न कोई नाव थी, न कोई बचाव दल और न ही कोई पड़ोसी मदद के लिए मौजूद था.