अधिकांश रोगियों में बीमारी का विस्तार होने के बाद इसकी जानकारी मिलती है। इसका एक प्रमुख कारण वर्तमान में अपनाई जाने वाली मानक जांच बायोप्सी का इनवेसिव होना है। इसी समस्या को देखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के शोधकर्ताओं ने अब एक आसान और सुई-रहित विधि विकसित की है, जो इस स्थिति को बदल सकती है।