यह पूरा नेटवर्क एपीके फाइल से ऑपरेट हो रहा था। खाताधारकों को एपीके फाइल डाउनलोड कराकर सारा एक्सेस खुद ले लेता था। इससे ओटीपी उसके ही पास आते थे। ऐसे में पुलिस नेटवर्क में ही उलझ जाती थी। लोकेशन दूसरे राज्य की मिलती और खाताधारक दूसरे राज्य में बैठा होता था।