दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ:ड्राफ्ट बिल को कैबिनेट मंजूरी, बहुमंजिला और हाईटेक कैंपस को मिलेगी अनुमति

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दिल्ली सरकार ने राजधानी में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और निगमित किए जाने संबंधी प्रारूप विधेयक को मंजूरी दे दी गई। अब इसे विचार और पारित करने के लिए दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, कानून लागू होने के बाद दिल्ली में विश्वस्तरीय निजी विश्वविद्यालय स्थापित हो सकेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर उच्च शिक्षा के विकल्प उपलब्ध कराने के साथ रिसर्च, इनोवेशन, उद्यमिता और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है। सरकार का दावा है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप दिल्ली को ग्लोबल एजुकेशन हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। दिल्ली के छात्रों को 25% सीटेंप्रस्तावित कानून में विद्यार्थियों के हितों पर विशेष जोर दिया गया है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में दिल्ली के छात्रों के लिए लागू आरक्षण नीति के अनुसार 25% सीटें आरक्षित रहेंगी। विश्वविद्यालयों को पारदर्शी और भेदभावरहित प्रवेश प्रक्रिया अपनानी होगी। प्रवेश, परीक्षा और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़े मानकों में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। सीमित जमीन में बनेंगे आधुनिक कैंपसदिल्ली में जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए बड़े भू-भाग वाले पारंपरिक परिसरों की अनिवार्यता नहीं होगी। आधुनिक, बहुमंजिला और शहरी कैंपस विकसित किए जा सकेंगे। हालांकि, संस्थानों के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा, छात्र सुविधाएं, रिसर्च क्षमता और बेहतर प्रशासन जैसे मानक पूरे करना जरूरी होगा। अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और उनके ऑफ-कैंपस केंद्रों के लिए भी दिल्ली में काम करने का रास्ता खुल सकता है। नियामक प्राधिकरण करेगा निगरानीनिजी विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटीज रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित की जाएगी। यह प्रवेश, परीक्षा, शिक्षण, रिसर्च, छात्र रिकॉर्ड और संस्थागत प्रदर्शन की निगरानी करेगी। विश्वविद्यालय के प्रस्तावों की जांच वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, यूजीसी प्रतिनिधियों और वित्त विशेषज्ञों की समिति करेगी। निजी विश्वविद्यालय स्व-वित्तपोषित होंगे और उन्हें सरकार से नियमित वित्तीय अनुदान नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से दिल्ली के युवाओं को अपने शहर में विश्वस्तरीय शिक्षा के अवसर मिलेंगे। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इसे दिल्ली को भारत की ‘नॉलेज कैपिटल’ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।