कमल गोड को यह सम्मान हस्तशिल्प से निर्मित महेश्वरी साड़ी की विशिष्ट बुनाई और पारंपरिक शिल्पकला के संरक्षण के लिए मिला। उन्होंने अपनी पुरस्कार विजेता कृति को महेश्वर की सांस्कृतिक विरासत और देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रेरणा को समर्पित बताया।