नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सोमवार को भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की। प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी विदेशी राजदूत के साथ शाह की यह पहली वन-टू-वन मुलाकात है। नवीन श्रीवास्तव ने शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के साथ अच्छे रिश्ते और सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। दोनों के बीच भारत-नेपाल संबंधों, विकास सहयोग और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा हुई। बालेन शाह ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते पुराने और भरोसेमंद हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने, बिजली, सड़क और दूसरे विकास कार्यों में मिलकर काम जारी रखने पर जोर दिया। बालेन शाह कुछ देर में चीनी राजदूत झांग माओमिंग से भी मिलेंगे। पहले विदेशी अधिकारियों से अकेले नहीं मिलते थे शाह प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में शाह ने विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करने की नीति अपनाई थी। वह विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते थे। इसी वजह से भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की 11-12 मई की नेपाल यात्रा के दौरान भी शाह से उनकी अकेले में मुलाकात नहीं हो सकी थी। शाह ने अमेरिकी अधिकारियों समीर पॉल कपूर और सर्जियो गोर से मुलाकात के अनुरोध भी स्वीकार नहीं किए थे। इसके बजाय शाह ने 9 अप्रैल और 26 मई को काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें की थीं। नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने विदेशी राजदूतों से अकेले मुलाकात न करने का रुख अपनाया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने भारत, चीन और अमेरिका समेत कई देशों के राजदूतों और वरिष्ठ अधिकारियों से वन-टू-वन बैठक से दूरी बनाए रखी। शाह का मानना था कि शक्तिशाली देश नेपाल की सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। सामूहिक बैठकों से वह सभी देशों के साथ बराबरी का संदेश देना चाहते थे। लेकिन सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद सलाहकारों ने उन्हें घरेलू और विदेशी स्तर पर अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इसके बाद शाह ने नेताओं, कारोबारियों और उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें शुरू कीं। अब विदेशी राजदूतों से सीधे मुलाकात भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक सीधे संवाद से दूरी बनाने पर नेपाल के कूटनीतिक रिश्तों पर असर पड़ने की चिंता भी थी। बालेन शाह के PM बनने से पहले क्या होता था? नेपाल में नई सरकार बनने के बाद भारत, चीन और अमेरिका जैसे बड़े देशों के राजदूत अक्सर सीधे प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात करते थे। कई बार ये बैठकें प्रधानमंत्री के निजी आवास पर होती थीं। इन मुलाकातों में विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद नहीं होते थे और इनका कोई औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था। नेपाल में लंबे समय से यह चलन था कि बड़े देशों के राजदूत प्रधानमंत्री से सीधे मिलकर अपनी बात रख सकते थे। माना जाता है कि इन मुलाकातों में आधिकारिक बातचीत के साथ व्यक्तिगत संपर्क बढ़ाने पर भी जोर रहता था। कुछ विशेषज्ञों का मानना था कि ऐसी अनौपचारिक मुलाकातों से हितों के टकराव का खतरा रहता था और नेपाल के राष्ट्रीय हितों पर भी सवाल उठ सकते थे। ---------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस:हारे तो मनमानी पर रोक लगेगी, नवंबर में होनी है वोटिंग अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की संभावना 65% तक है। मिडटर्म के लिए वोटिंग नवंबर में होनी है।