यमुना पुनर्जीवन के लिए 'यमुना संवाद' का पहला चरण पूरा:सितंबर में तैयार होगा रोडमैप, तीन परामर्श कार्यशालाएं पूरी, जीरो ड्राफ्ट बनेगा

Wait 5 sec.

दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने यमुना के पुनर्जीवन के लिए शुरू की गई 'यमुना संवाद' पहल के तहत तीन हितधारक परामर्श कार्यशालाओं का सफलतापूर्वक समापन कर लिया है। इस पहल का उद्देश्य यमुना के फ्लडप्लेन के संरक्षण, विकास और पुनर्जीवन के लिए सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी से दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करना है। हाल ही में एलजी ने यमुना खादर क्षेत्र का निरीक्षण कर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। उन्होंने नदी में प्रदूषण कम करने, फ्लडप्लेन संरक्षण और यमुना को पुनर्जीवित करने के लिए बहुआयामी एवं समन्वित रणनीति अपनाने के निर्देश दिए थे। कार्यशाला में विभिन्न संगठनों ने किया प्रतिभाग कार्यशालाओं में नीति-निर्माताओं, सरकारी एजेंसियों, पर्यावरण विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शहरी योजनाकारों, लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स, वित्तीय संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज संगठनों ने भाग लिया। इस दौरान छह प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें फ्लडप्लेन आधारित नियोजन, घाटों का विकास, प्रकृति-आधारित समाधान, जल गुणवत्ता सुधार, ड्रेनेज प्रबंधन, सतत वित्तीय मॉडल और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था शामिल रहे। दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट' के जीरो ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा डीडीए के अनुसार, इन चर्चाओं से प्राप्त सुझावों को 'दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट' के जीरो ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। यह मसौदा सभी हितधारकों के साथ साझा कर सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को बांसेरा (नई दिल्ली) में आयोजित होने वाले मुख्य 'यमुना संवाद' में इस पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। एलजी टी.एस. संधू ने कहा कि यमुना का कायाकल्प किसी एक संस्था के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए सरकार, विशेषज्ञों, नागरिक संगठनों और आम लोगों की साझेदारी जरूरी है। उन्होंने यमुना को स्वच्छ, सुरक्षित और जीवंत नदी गलियारे के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।