श्रावण-भाद्रपद मास के प्रथम सोमवार को जब अवंतिकानाथ भगवान महाकाल रजत पालकी में विराजमान होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे, तब केवल उज्जैन ही नहीं, मानो समूचा भूमंडल उनके दर्शन की प्यास लिए सवारी मार्ग पर उमड़ पड़ेगा। उस क्षण तीर्थनगरी अवंतिका कमल-दल की भांति खिल उठती है।