'ज़िंदगी जीने के दो ही तरीक़े होते हैं': 'रंग दे बसंती' जैसी फ़िल्मों और जेन ज़ी प्रोटेस्ट के बीच आख़िर रिश्ता क्या है?

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आंदोलनों और सिनेमा का रिश्ता कभी एकतरफ़ा नहीं रहा है. सिनेमा आंदोलनों को दिखाता भी है और कई बार उन्हें आकार भी देता है.