चेसिस नंबर की जांच में वाहन का वास्तविक पंजीयन अलग मिला, जिसके बाद आरोपियों पर गोवंश संरक्षण और पशु क्रूरता से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।