Wi-Fi 8 से मिट जाएगा कनेक्शन ड्रॉप होने का झंझट, कितनी फास्ट होगी?

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Wi-Fi 8: अभी भले ही Wi-Fi 6 को ही ज्यादातर जगहों पर यूज किया जा रहा है और लोगों के पास Wi-Fi 7 राउटर नहीं पहुंचे हैं, लेकिन एक नए वायरलेस स्टैंडर्ड Wi-Fi 8 की टेस्टिंग शुरू हो गई है. करीब दो साल बाद यानी 2028 में इसे लॉन्च किया जा सकता है. इसे टेस्ट करने वाली चाइनीज कंपनी TP-Link का कहना है कि यह कॉन्सेप्ट से निकलकर असल दुनिया में दस्तक देने की तैयारी कर रही है. नेक्स्ट जनरेशन टेक्नोलॉजी होने के कारण इसमें बेहतर स्पीड मिलेगी, लेकिन यह रिलायबिलिटी पर ज्यादा फोकस करेगी. यानी इस टेक्नोलॉजी में स्पीड को बेहतर करने की बजाय कनेक्शन को स्टेबल बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.क्या है Wi-Fi 8?यह एक नया वायरलेस स्टैंडर्ड है, जिसकी टेस्टिंग चल रही है. यह 6GHz स्पेक्ट्रम, 320MHz चैनल्स और मल्टी-लिंक ऑपरेशन (MLO) जैसी Wi-Fi 6E और Wi-Fi 7 के साथ आईं टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगी. नए स्टैंडर्ड में बेहतर स्पीड तो मिलेगी ही, साथ ही इसमें ज्यादा ट्रैफिक वाले इलाकों में इसे रिलायबल बनाने पर जोर दिया जाएगा. इंडस्ट्री इस कॉन्सेप्ट को अल्ट्रा हाई रिलायबिलिटी (UHR) के नाम से जान रही है. UHR को हासिल करने के लिए यह कई मौजूदा टेक्नोलॉजी के साथ-साथ कई नई टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल करेगी. इसमें मल्टी-एक्सेस प्वाइंट कॉर्डिनेशन टेक्नोलॉजी का एक नया वर्जन यूज किया जाएगा. इसकी मदद से ज्यादा ट्रैफिक वाले इलाकों में लगे एक्सेस प्वाइंट अपने रिसोर्सेस शेयर कर पाएंगे, जिससे स्पीड और स्टेबिलिटी बढ़ेगी.Wi-Fi 8 में इस्तेमाल होंगी ये नई टेक्नोलॉजीWi-Fi 8 में पर्दे के पीछे कई टेक्नोलॉजी काम करने वाली हैं. इसमें कॉर्डिनेटेड स्पेटियल रीयूज (Co-SR) का इस्तेमाल कर एक्सेस प्वाइंट अपनी ट्रांसमिट पावर को एडजस्ट कर पाएंगे. इसी तरह कॉर्डिनेटेड टाइम डिविजन मल्टीपल एक्सेस (Co-TDMA) की मदद से एक्सेस प्वाइंट रिजर्व्ड टाइम स्लॉट में ट्रांसमिशन को शेयर कर पाएंगे. इसमें सिग्नल क्वालिटी को बेहतर करने के लिए कॉर्डिनेटेड बीमफॉर्मिंग को शामिल किया जाएगा. पुरानी टेक्नोलॉजी की बात करें तो यह Wi-Fi 6 की टारगेट वेक टाइम (TWT) और Wi-Fi 7 की रेस्ट्रिक्टेड टारेगट वेक टाइम (R-TWT) की भी मदद लेगी.Wi-Fi 8 में कनेक्शन कैसे स्टेबल होंगे?लेटेंसी कम करने और अपार्टमेंट बिल्डिंग, एयरपोर्ट और शॉपिंग सेंटर जैसे ज्यादा ट्रैफिक वाली जगहों पर नेटवर्क कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए इसमें कई स्पेक्ट्रम-एफिशिएंसी टेक्नोलॉजी की मदद ली जाएगी. इसमें पहली टेक्नोलॉजी डायनामिक सब-ब्रांड ऑपरेशन (DSO) है. यह किसी भी एक्सेस प्वाइंट को 320MHz चैनल जैसे वाइड चैनल को स्प्लिट करने का ऑप्शन देगा, जिससे एक साथ कई डिवाइस को सर्व किया जा सकता है. इसी तरह इसमें नॉन-प्राइमरी चैनल एक्सेस (NPCA) का सहारा लिया जाएगा, जिसकी मदद से प्राइमरी चैनल अवेलेबल न होने पर डिवाइस सेकेंडरी चैनल को एक्सेस कर पाएंगे. इससे प्राइमरी चैनल के अवेलेबल न होने पर डेटा फ्लो रुकेगा नहीं. नए स्टैडर्ड में सिंगल मोबिलिटी डोमेन को भी शामिल किया गया है. यह एक नया कॉन्सेप्ट है. वाई-फाई के मौजूदा वर्जन में जब कोई क्लाइंट डिवाइस किसी दूसरे एक्सेस प्वाइंट से कनेक्ट होना चाहता है तो पहले एक्सेस प्वाइंट से उसका कनेक्शन टूट जाता है, जिससे थोड़ा डिले होता है. अब नए कॉन्सेप्ट से डिवाइस कनेक्शन तोड़े बिना ही दूसरे एक्सेस प्वाइंट से कनेक्ट हो पाएगा. Wi-Fi 8 का क्या फायदा होगा?नए स्टैंडर्ड को एआई पावर्ड सिस्टम, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और रोबोटिक्स आदि को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है. मौजूदा वर्जन में इन चीजों से लेकर जो दिक्कतें आ रही हैं, नए वर्जन में वो दूर जाएंगी. इसी तरह यह लगभग 25 प्रतिशत तेज स्पीड के साथ भीड़भाड़ और ज्यादा इंटरनेट ट्रैफिक वाली जगहों पर भी स्टेबल कनेक्शन दे पाएगा. इससे एक राउटर पर ज्यादा डिवाइस कनेक्ट होने के बाद भी कनेक्शन ड्रॉप जैसी परेशानी नहीं आएगी. कब यूज कर पाएंगे Wi-Fi 8?उम्मीद की जा रही है कि Wi-Fi 8 को 2028 की पहली छमाही में अप्रूवल मिल जाएगी. अप्रूवल मिलते ही सपोर्टेड डिवाइसेस मार्केट में आने शुरू हो जाएंगे. आसुस ने CES 2026 में Wi-Fi 8 हार्डवेयर का एक कॉन्सेप्ट दिखाया था, लेकिन सर्टिफाइड राउटर और क्लाइंट डिवाइसेस के लिए 2028 तक का इंतजार करना ही पड़ेगा. भारत की बात करें तो यहां नया स्टैंडर्ड आने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है.ये भी पढ़ें-रोज के कामों के लिए कितनी इंटरनेट स्पीड जरूरी है? यहां देखें हिसाब