Generative AI India: दुनिया भर में आज एआई का बोल-बाला है. इसकी वजह से कई सारे नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं और इस के कारण कई सारी नौकरियों के भी खत्म हो चुकी है. इससे भारत भी अछूता नहीं रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में जनरेटिव एआई की वजह से दो तरह के बदलाव होगें. पहला करीब 42 से 48% कामकाजों को इस नई टेक्नोलॉजी से फायदा मिलेगा, वहीं दूसरी और इसके कारण लगभग 8 से 12% नौकरियां खतरे में आ जाएगी. हालियां पब्लिश गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में तो ऐसा ही देखने को मिला. एआई सोचकर लिखने वाले काम बड़ी आसानी से कर सकती है जैसे, कठिन प्रश्नों के जवाब देना, रिपोर्ट तैयार करना और सुझाव देना.गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब 9 से 17% अकृषि कार्य इससे बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं. यह एआई की कार्यशैली पर निर्भर करता है, कि वो कितने जटिल कामों को कितने कम समय में निपटा सकता है. रिपोर्ट के आधार पर यह अनुमानित आंकड़ा 13 से 15% रखा गया है.जहां एआई का असर सीमित रहेगा, कर्मचारियों का काम आसान बनाएगा और उनका समय बचाएगा. जिससे वह अपना किमती समय बचाकर कुछ नया सिख सकें. लेकिन जहां गलतियों की गुंजाइश ज्यादा है, वहां नौकरी जाने का खतरा ज्यादा रहेगा. इसका सबसे कम असर शारीरिक श्रम वाले कामों पर होगा. भारत में एआई क्या असर दिखा सकती है?1. अर्थव्यवस्था- माना जा रहा है कि एआई से करीब 0.8% उत्पादन हर साल बढ़ सकता है. मतलब आज के समय की ग्रोथ अगर 10% है, तो आने वाले 10 सालों में एआई इसे 10.8% तक पहुंचा देगा. लेकिन ये इसकी काम करने की क्षमता पर निर्भर करेगा. 2. नौकरियां- एआई के कारण टेक सेक्टर में 10 लाख नई नौकरियों का बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. और देश के कुल गैर-कृषि रोजगार में टेक सेक्टर की हिस्सेदारी 2% के करीब है. वहीं एआई के कारण भारत की 6 बड़ी आईटी कंपनियों में 3 साल में 64,000 नौकरियों की कटौती भी देखने को मिली. वहीं इसके कारण टेक सेक्टर में 7 लाख नई नौकरियां भी जुड़ी. 3. नया सेक्टर जीसीसी- पिछलें 15 सालों में ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर यानी जीसीसी की संख्या बढ़कर तीन गुनी हो गई. तो वहीं इसमें कर्मचारियों की संख्या में करीब 6 गुना और इनकम में 8 गुना की बढ़ोतरी देखने को मिली. इस सेक्टर में आय औसतन 9.3 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी हैं. 4. इंडस्ट्री को बढ़ावा- जनवरी से मार्च तक के समय में सर्विस निर्यात देश की जीडीपी का करीब 10.7% तक रहा, जो पिछले साल 10.1% ही था. इसमें भी कुल सर्विस निर्यात में सॉफ्टवेयर और बिजनेस से जुड़ी सर्विसेज की हिस्सेदारी 75% का आंकड़ा पार कर चुकी है. यह भी पढ़ें: डेल ने भारत में उतारे तीन कमाल के लैपटॉप, मिलेंगे ये फीचर्सडेटा सेंटर की कमीडेटा सेंटर बनाने में भारत अब भी काफी पीछे है. दुनिया भर के डेटा सेंटर क्षमता में भारत की हिस्सेदारी मात्र 1% है. वहीं भारत के मुकाबले अमेरिका के पास 47% और चीन के पास 25% की हिस्सेदारी है. आज के समय में भारत की मौजूदा क्षमता केवल 1 गीगॉवाट ही है. इसका मतलब यह है कि देश में फिलहाल ज्यादा बिजली खपत करने लायक डेटा सेंटर का ढांचा मौजूद नहीं है. यह भी पढ़ें: रोज के कामों के लिए कितनी इंटरनेट स्पीड जरूरी है? यहां देखें हिसाब