जानकार इस बात पर एकमत हैं कि भारत की सहमति के बिना उन्होंने ऐसा बयान नहीं दिया होगा, क्योंकि अभी भारत ही उन्हें शरण दिए हुए है. लेकिन सवाल ये है कि भारत को शेख़ हसीना के इस फ़ैसले से क्या फ़ायदा हो सकता है?