जरूरत की खबर- महाराष्ट्र में 23 लाख लीटर मिलावटी दूध:कहीं आप भी तो नहीं पी रहे सिंथेटिक दूध, घर पर ऐसे करें शुद्धता की जांच

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हाल ही में महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में सिंथेटिक दूध बनाने और बेचने वाले बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस और ‘फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (FDA) की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में सिंथेटिक दूध और उसे बनाने का सामान बरामद किया गया। जांच में पता चला कि पिछले 6 महीनों में खराब क्वालिटी के मिल्क पाउडर से करीब 23 लाख लीटर सिंथेटिक दूध तैयार किया गया। हर 10 लीटर शुद्ध दूध में करीब 1 लीटर मिलावटी दूध मिलाकर बाजार में बेचा जा रहा था। शुरुआती जांच के आधार पर आशंका है कि 2 करोड़ लीटर से ज्यादा मिलावटी दूध बाजार में सप्लाई किया जा चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंथेटिक दूध बनाने में कई तरह के केमिकल्स, डिटर्जेंट, पाम ऑयल और दूसरी चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा था। लंबे समय तक ऐसा दूध पीने से लिवर और किडनी खराब हो सकती है। साथ ही पेट से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। यह मामला सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। देश के कई राज्यों से अक्सर सिंथेटिक और मिलावटी दूध पकड़े जाने के मामले सामने आते रहते हैं। इसलिए 'जरूरत की खबर' में आज जानेंगे कि सिंथेटिक दूध की पहचान कैसे करें। साथ ही यह भी समझेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. उमेश कुमार, फूड एनालिस्ट, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- महाराष्ट्र में पकड़े गए सिंथेटिक मिल्क पाउडर में किन चीजों की मिलावट की जा रही थी? जवाब- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र में पकड़े गए सिंथेटिक मिल्क में डिटर्जेंट पाउडर, पाम ऑयल, केमिकल और खराब मिल्क पाउडर जैसी कई चीजों की मिलावट की जा रही थी। सवाल- जो खतरनाक सब्सटेंस मिलाया जा रहा था, उससे क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- डिटर्जेंट, खराब क्वालिटी के मिल्क पाउडर और पॉम ऑयल से तैयार सिंथेटिक दूध कई ऑर्गन्स को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। डिटेल ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर कोई हमेशा ये नकली सिंथेटिक दूध ही पी रहा है तो इससे क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? जवाब- नकली दूध पीने से शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म में शरीर को कई गंभीर नुकसान और हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। शॉर्ट टर्म हेल्थ रिस्क लॉन्ग टर्म हेल्थ रिस्क सवाल- सिंथेटिक दूध किन लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है? जवाब- सिंथेटिक दूध में मौजूद मिलावटी चीजें हर किसी के लिए नुकसानदायक हैं, लेकिन कुछ लोगों में इनका असर जल्दी और ज्यादा गंभीर हो सकता है, जैसेकि- सवाल- घर पर सिंथेटिक दूध की पहचान कैसे करें? जवाब- घर पर कुछ आसान तरीकों से दूध में मिलावट का पता लगाया जा सकता है। सभी तरीके ग्राफिक में देखिए- सवाल- बाजार से दूध खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- कुछ छोटी-छोटी सावधानियां मिलावटी या खराब क्वालिटी वाले दूध से बचा सकती हैं। ग्राफिक में सभी जरूरी सावधानियां देखिए- सवाल- डेयरी से दूध लेते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- अगर आप डेयरी या दूध विक्रेता से खुला दूध खरीदते हैं तो सिर्फ भरोसेमंद सोर्स से ही लें। दूध की क्वालिटी और साफ-सफाई पर खास ध्यान दें। ग्राफिक में सभी सेफ्टी टिप्स देखिए- सवाल- क्या दूध को उबालने से रिस्क खत्म हो जाता है? जवाब- नहीं, दूध उबालने से कुछ माइक्रोऑर्गेनिज्म खत्म हो सकते हैं। लेकिन डिटर्जेंट, सिंथेटिक केमिकल्स या अन्य मिलावटी चीजें उबालने से खत्म नहीं होतीं। सवाल- क्या मिल्क पाउडर से बना दूध भी सिंथेटिक होता है? जवाब- नहीं, FSSAI के मानकों के मुताबिक, फूड-ग्रेड मिल्क पाउडर में तय मात्रा में पानी मिलाकर बनाया गया 'रीकंस्टीट्यूटेड दूध' सिंथेटिक दूध नहीं होता है। सिंथेटिक दूध वह है, जिसमें डिटर्जेंट, यूरिया, तेल या दूसरे केमिकल्स मिलाकर असली दूध जैसा दिखाने की कोशिश की जाती है। सवाल- अगर दूध में मिलावट का शक हो तो क्या करें? जवाब- अगर दूध मिलावटी लगे तो तुरंत ये कदम उठाएं- सवाल- दूध में मिलावट की शिकायत कहां करें? जवाब- अगर दूध में मिलावट का शक हो तो इसकी शिकायत FSSAI के फूड सेफ्टी कनेक्ट एप पोर्टल/एप पर दर्ज की जा सकती है। सवाल- किसी भी फूड में मिलावट पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट’, 2006 के तहत कार्रवाई होती है। मिलावट की गंभीरता के आधार पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द करना और जेल की सजा तक हो सकती है। अगर मिलावट से किसी को गंभीर बीमारी या मौत होती है, तो सजा और कड़ी हो जाती है। ……………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- तमिलनाडु में रंगीन पापड़ पर बैन: सिंथेटिक कलर खतरनाक, किडनी-लिवर डैमेज का रिस्क, खरीदते हुए ध्यान रखें ये 6 बातें हाल ही में तमिलनाडु सरकार ने रंगीन पापड़ों (फ्राइम्स/कचरी) की बिक्री पर रोक लगा दी है। राज्य के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने जांच में पाया कि इनमें सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल हो रहा था, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। विभाग ने इसे खासकर बच्चों की सेहत के लिए खतरा बताया है। पूरी खबर पढ़िए…