शास्त्रों के अनुसार दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक देवी-देवताओं का विश्राम काल होने से सामान्य पूजा वर्जित है। जबकि ब्रह्म मुहूर्त और प्रातः काल पूजा के लिए सबसे उत्तम माने गए हैं।