साइबर लिटरेसी- नवरात्रि में सक्रिय हुए ठग:गरबा पार्टनर के नाम पर स्कैम, सोशल मीडिया विज्ञापन के पीछे ठगी का जाल, जानें कैसे बचें

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इन दिनों देशभर में गरबा और डांडिया की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ के नाम से कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं। इनमें गरबा पार्टनर के साथ डांस, फोटो, रील्स और आउटिंग आदि का दावा किया जा रहा है। सिल्वर, गोल्ड और प्लैटिनम पैकेज के नाम से मिल रहे इन ऑफर्स की कीमत 1,000 से 6,000 रुपए तक है। सुनने में यह दिलचस्प लग सकता है। लेकिन क्या वाकई ये ऑफर्स भरोसेमंद हैं? हाल ही में अहमदाबाद साइबर पुलिस ने ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ नाम से सोशल मीडिया पर आने वाली पोस्ट्स को लेकर लोगों को सतर्क किया है। इसलिए आज ‘साइबर लिटरेसी’ में ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ के नाम पर होने वाले स्कैम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’ क्या है? सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड कैसे शुरू हुआ? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- ट्रेंड कैसे शुरू हुआ? सवाल- इन पोस्ट्स में लोगों को वास्तव में क्या ऑफर किया जा रहा है? जवाब- इन पोस्ट्स में गरबा या डांडिया के लिए पार्टनर बुकिंग का दावा किया जा रहा है। इसके साथ कई तरह की सुविधाएं भी ऑफर की जा रही हैं। कुछ पोस्ट्स में इन्हें सिल्वर, गोल्ड और प्लेटिनम जैसे पैकेज में बांटा गया है। इनमें शामिल सुविधाएं हैं- सवाल- साइबर पुलिस इसे स्कैम क्यों कह रही है और लोगों को क्यों सावधान रहने को कहा जा रहा है? जवाब- साइबर पुलिस के मुताबिक, इन वायरल पोस्ट्स के जरिए ठग लोगों को फर्जी ऑफर का झांसा देकर ठगी कर सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- गरबा पार्टनर के नाम पर स्कैमर्स लोगों को कैसे ठग सकते हैं? जवाब- स्कैमर्स अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बना सकते हैं- सवाल- असली ऑफर और फ्रॉड ऑफर में फर्क कैसे पहचानें? जवाब- असली ऑफर में आमतौर पर आयोजक, कंपनी या सर्विस प्रोवाइडर की जानकारी बिल्कुल स्पष्ट होती है। वहीं फ्रॉड ऑफर्स में जानकारी आधी–अधूरी होती है और जल्दबाजी में पैसे भेजने का दबाव बनाया जाता है। असली और फ्रॉड ऑफर में फर्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- ठगी से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतना जरूरी है? जवाब- इसके लिए बुकिंग के दौरान कुछ बातों का खास ख्याल रखें। सभी जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- आइए अब इसे विस्तार से समझते हैं- प्रोफाइल वेरिफाई करें लिंक और एप से सावधान रहें पर्सनल डिटेल्स शेयर न करें पैसे भेजने में जल्दबाजी न करें फोटो-वीडियो न भेजें मुलाकात में सावधानी रखें सवाल- क्या हर वेरिफाइड अकाउंट को भरोसेमंद मानना सही है? जवाब- नहीं, हर वेरिफाइड अकाउंट सेफ नहीं होता। असल में अकाउंट का वेरीफाइड होना किसी ऑफर या सर्विस के सुरक्षित और असली होने की गारंटी नहीं है। सवाल- क्या सिर्फ ज्यादा फॉलोअर्स होना भरोसे की गारंटी है? जवाब- नहीं, फॉलोअर्स फर्जी या खरीदे हुए भी हो सकते हैं। इसलिए सर्विस लेने से पहले व्यक्ति या संस्था की पहचान और ऑफर की जानकारी अलग से वेरिफाई करें। सवाल- क्या कमेंट्स और लाइक्स से किसी अकाउंट की ऑथेंटिसिटी पता चल सकती है? जवाब- नहीं, इसे भरोसे का प्रमाण नहीं मानें। इन्हें फर्जी तरीके से भी बढ़ाया जा सकता है। सवाल- वायरल पोस्ट देखकर लोग ज्यादा भरोसा क्यों करते हैं? जवाब- ज्यादा व्यूज, लाइक्स, शेयर और कमेंट्स देखकर लोगों को लगता है कि पोस्ट भरोसेमंद है। इसे साइकोलॉजी में ‘सोशल प्रूफ’ कहा जाता है। यानी जब बहुत सारे लोग किसी चीज में दिलचस्पी दिखाते नजर आते हैं, तो हमें भी वह सही या लोकप्रिय लगने लगती है। साइबर ठग इसी भरोसे का फायदा उठाते हैं। सवाल- त्योहारों के समय स्कैमर्स ज्यादा एक्टिव होते हैं। गरबा स्कैम के अलावा इस समय और किस तरह के स्कैम हो सकते हैं? जवाब- त्योहारों के दौरान साइबर अपराधी फर्जी शॉपिंग ऑफर, टिकट, डिलीवरी और पेमेंट के नाम पर ठगी कर सकते हैं। कुछ कॉमन स्कैम ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर फ्रॉड हो गया है, पैसे भेज दिए हैं तो तुरंत क्या कदम उठाएं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत कैसे करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- शिकायत करते समय कौन-कौन से स्क्रीनशॉट्स पास रखें? जवाब- इस दौरान ये स्क्रीनशॉट जरूर सुरक्षित रखें- सवाल- अगर शिकायत करने में देरी हो तो इससे क्या फर्क पड़ सकता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- इसलिए साइबर ठगी का पता चलते ही तुरंत रिपोर्ट करना जरूरी है। ………………………….. ये खबर भी पढ़ें…साइबर लिटरेसी- स्कॉलरशिप के नाम पर स्कैम:छात्र और पेरेंट्स सावधान! पहचानें सही और फर्जी ऑफर का फर्क, आवेदन से जुड़ी 17 सावधानियां हर साल हजारों छात्र इंटरनेशनल स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करते हैं। इससे उन्हें फीस, आवास और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों के लिए आर्थिक मदद मिलती है। लेकिन अब साइबर अपराधियों की नजर इस पर भी पड़ चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…