जानकीकुंड नेत्र चिकित्सालय और सद्गुरु सेवा ट्रस्ट की शुरुआत पद्मश्री बीके जैन ने की थी। उस समय नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित किया गया तो सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि लोग तैयार नहीं होते थे।