सीएनएन ने लिखा है, प्रधानमंत्री मोदी ने अब तक इन मौतों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन कुछ श्रमिक संगठनों की ओर से उन पर हमले की स्पष्ट निंदा करने का दबाव बढ़ रहा है.