Polio Virus Detected In Ghaziabad Sewage Samples: गाजियाबाद में सीवेज के एक नमूने में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है. हालांकि अभी तक किसी बच्चे में पोलियो इंफेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सीवेज में वायरस की मौजूदगी ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है. इसके बाद प्रभावित इलाकों में विशेष निगरानी और घर-घर सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. क्या है पूरा मामला?जानकारी के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से हर महीने पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराता है. हाल ही में डुंडाहेड़ा एसटीपी से लिया गया नमूना जांच के लिए भेजा गया था, जिसकी रिपोर्ट में VDPV-1 स्ट्रेन की पुष्टि हुई. रिपोर्ट सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए. 12 इलाकों की जांचअधिकारियों ने 12 शहरी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू करने का फैसला लिया है. इसके लिए 107 स्वास्थ्य टीमों को तैनात किया गया है. ये टीमें पांच साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति, टीकाकरण रिकॉर्ड और किसी संभावित बीमारी के लक्षणों की जानकारी जुटाएंगी. सर्वे राजनगर, शास्त्री नगर, बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रियल एरिया, दौलतपुरा, न्यू पंचवटी कॉलोनी, घुकना, हिंडन विहार, कैला भट्टा, मिर्जापुर, विजय नगर-1, विजय नगर-2 और खैराती नगर जैसे इलाकों में किया जाएगा. स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि नियमित टीकाकरण में कमी या कुछ बच्चों का वैक्सीन से छूट जाना इस वायरस के मिलने की एक बड़ी वजह हो सकती है. यही कारण है कि अब टीकाकरण कवरेज की भी समीक्षा की जा रही है. ताकि स्थिति का सही तरीके से पता लगाया जा सके और इसको फैलने से रोका जा सके. इसे भी पढ़ें- Weight Loss Drug: मोटापा कम करने का नया कमाल, 52 नहीं अब सिर्फ 12 इंजेक्शन में चलेगा काम, जानें कैसे?यह कंडीशन कितनी खतरनाक?हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग की रिपोर्ट के अनुसार, पोलियो एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो व्यक्ति से व्यक्ति में फैल सकती है. यह बीमारी इम्यून सिस्टम पर हमला करती है और गंभीर मामलों में स्थायी लकवा या जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है. हालांकि सीवेज में वायरस का मिलना सीधे तौर पर किसी प्रकोप की पुष्टि नहीं करता, लेकिन यह संकेत जरूर देता है कि वायरस किसी स्तर पर समुदाय में मौजूद हो सकता है.निगरानी का महत्वपूर्ण तरीकादरअसल, सीवेज या वेस्टवॉटर की जांच सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी का एक महत्वपूर्ण तरीका माना जाता है. इससे वायरस की मौजूदगी का पता उस समय भी चल सकता है, जब किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण सामने न आए हों. एक्सपर्ट के अनुसार यदि समय रहते निगरानी और टीकाकरण को मजबूत नहीं किया गया तो वायरस संवेदनशील आबादी तक पहुंच सकता है.इसे भी पढ़ें - Summer Health Tips: दिनभर धूप में करते हैं काम तो जा सकती है जान, इन स्मार्ट तरीकों से खुद का रखें ख्यालDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.