भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, यह मंदिर ईसा पश्चात 108 ईस्वी का है, जो इसे देश में नागर शैली की वास्तुकला का सबसे पहला और प्राचीनतम जीवंत उदाहरण बनाता है।