सवाल– मैं 27 साल की हूं और फ्रीलांस काम करती हूं। मेरी सबसे बड़ी परेशानी यह है कि मैं हर काम को टालती रहती हूं, चाहे वह कितना भी जरूरी क्यों न हो। दिन की शुरुआत बड़े प्लान के साथ करती हूं, टू-डू लिस्ट बनाती हूं, डेडलाइन सेट करती हूं, लेकिन जैसे ही काम शुरू करने का समय आता है, मैं सोशल मीडिया स्क्रॉल करने लगती हूं या छोटे-मोटे गैर-जरूरी कामों में लग जाती हूं।फिर आखिरी समय में स्ट्रेस और तनाव में काम पूरा करती हूं। कई बार खुद से वादा किया कि अब ऐसा नहीं करूंगी, लेकिन हो नहीं पाता। समझ नहीं आता कि मैं आलसी हूं या इसके पीछे कोई और मानसिक कारण है। प्लीज हेल्प मी। एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। जैसाकि आपने लिखा है कि आप काम की योजना बनाती हैं, समय सीमा तय करती हैं और यह भी जानती हैं कि काम कितना जरूरी है। लेकिन जैसे ही काम शुरू करने का समय आता है, आप मोबाइल देखने लगती हैं या दूसरे छोटे-मोटे कामों में लग जाती हैं। फिर जब समय बहुत कम बचता है तो तनाव में आकर जल्दी–जल्दी काम पूरा करती हैं।मनोविज्ञान की भाषा में इसे प्रोक्रैस्टिनेशन कहते हैं। यह केवल आलस नहीं है। ये काम टालने की आदत है यानी कोई जरूरी काम जानते-बूझते टालना, जबकि व्यक्ति जानता है कि इससे बाद में उसे परेशानी होगी।विशेषज्ञों के अनुसार, यह अक्सर अपने मन, भावनाओं और फोकस से जुड़ा होता है। हम जरूरी काम क्यों टालते हैं?प्रोक्रैस्टिनेशन यानी जरूरी काम को टालने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। पहले नीचे ग्राफिक में देखिए, फिर इन्हें एक–एक करके समझते हैं– 1. मन को चाहिए इंस्टेंट रिलीफ अगर कोई काम मुश्किल, उबाऊ, उलझन भरा या डर पैदा करने वाला लगे तो दिमाग उससे बचने की कोशिश करता है। ऐसे में मोबाइल, वीडियो या सोशल मीडिया तुरंत थोड़ी खुशी और राहत दे देते हैं।असल में व्यक्ति काम से नहीं, बल्कि उस काम से जुड़ी बेचैनी से बच रहा होता है। 2. मन में खींचतान– काम करूं या न करूं एक तरफ मन कहता है– "मुझे यह काम करना चाहिए।"दूसरी तरफ मन कहता है– "अभी नहीं।"इस टकराव से अपराधबोध पैदा होता है। उससे बचने के लिए हम खुद को समझाने लगते हैं- 3. सोचने के तरीके से बढ़ती परेशानी काम टालने वाले लोगों में अक्सर कुछ खास तरह की सोच दिखाई देती है। 4. मोबाइल फोन यानी इंस्टेंट रिवॉर्ड आज के समय में मोबाइल और सोशल मीडिया तुरंत खुशी देते हैं। वहीं काम का फायदा बाद में मिलता है। जब तुरंत मिलने वाला सुख सामने हो और काम का परिणाम दूर दिखाई दे, तो काम टालने की संभावना बढ़ जाती है। खासतौर पर घर से काम करने वालों में यह समस्या ज्यादा दिखाई देती है, क्योंकि उनके ऊपर दफ्तर जैसी बाहरी व्यवस्था नहीं होती। आपका असली डर क्या है? प्रोक्रैस्टिनेशन के पीछे हमेशा कोई छिपा हुआ इमोशनल कारण होता है। आप काम को टालने या न करने के लिए खुद से जो कह रहे हैं, उसके पीछे छिपा हुआ इमोशनल कारण कुछ और है। आपको अपने कारण हो पहचानना है और फिर उसे रिजॉल्व करने की कोशिश करनी है। सामान्य देरी और काम टालने में क्या फर्क है?ये समझना जरूरी है कि ताकि आप अपने पैटर्न की बेहतर एनालिसिस कर सकें। जैसेकि सामान्य तौर पर होने वाली देरी का अर्थ है कि– काम टालना क्या आप प्रोक्रैस्टिनेशन का शिकार हैं? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 10 सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब 'कभी नहीं' है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब 'हमेशा' है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। स्कोर का इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। प्रोक्रैस्टिनेशन की आदत से कैसे पाएं छुटकारा पहला कदम पूरे काम के बारे में मत सोचिएगलत सोच: "आज पूरा प्रोजेक्ट खत्म करना है।"सही सोच: "आज सिर्फ 10 मिनट बैठकर मुख्य बिंदु लिखने हैं।"जब पहला छोटा कदम उठ जाता है, तो आगे बढ़ना आसान हो जाता है। दूसरा कदम अपने मन की बात पकड़िएअपनी डायरी में लिखिए— तीसरा कदम अपने विचारों को परखिएअगर मन कहे— "मेरा मन नहीं है।" तो खुद से कहें— "मन काम शुरू करने के बाद भी बन सकता है।" अगर मन कहे— "यह बिल्कुल सही होना चाहिए।"तो खुद से कहें— "पहला ड्राफ्ट अच्छा न भी हो तो चलेगा।" अगर मन कहे— "मैं कल कर लूंगी।"तो खुद से पूछें— "क्या कल सचमुच कुछ अलग होगा?"चौथा कदम असली वजह पहचानिएयह वाक्य पूरा कीजिए—"मैं जानती हूं कि यह काम जरूरी है, लेकिन मैं इसे टाल रही हूं क्योंकि......"अब खाली जगह में अपने मन का संभावित कारण लिखिए। फिर लिखिए—"आज मैं पहला छोटा कदम क्या उठाऊंगी?"कुछ उदाहरण— पांचवां कदम माहौल बदलिएकाम शुरू करने से पहले— छठा कदम रोज सिर्फ तीन काम करें हर रोज सुबह उठकर केवल तीन काम करना तय करें, जो उस दिन का सबसे जरूरी काम हो।अपने कामों को तीन कैटेगरी में बांटें– इसके बाद सबसे जरूरी काम का पहला छोटा कदम तुरंत शुरू कर दें। याद रखें, योजना बनाना और काम करना, दोनों अलग बातें हैं। सिर्फ योजना बनाते रहने से काम पूरा नहीं होता। प्रोफेशनल मदद कब जरूरी? अगर काम टालने की आदत के साथ ये समस्याएं भी दिखें तो तो किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। जैसेकि– अंतिम बात कई बार अत्यधिक चिंता, अवसाद, थकान या फोकस से जुड़ी समस्याएं भी काम टालने की आदत को बढ़ा देती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि इसे चरित्र की कमजोरी न समझें। यह एक ऐसी आदत है, जिसे सही समझ, छोटे कदमों और नियमित अभ्यास से बदला जा सकता है। ………………ये खबर भी पढ़िएमेंटल हेल्थ- परफेक्शन की चाह में डेडलाइन मिस:बेस्ट करने में चक्कर में अटक रहा काम, करियर पर बुरा असर, संतुलन कैसे बनाऊं आप जो बता रहे हैं, वह सिर्फ ‘ज्यादा मेहनती’ या ‘डिटेल पर ध्यान देने वाला’ होने की बात नहीं है। शुरू में परफेक्शन की आदत आपको आगे बढ़ाती है, लेकिन जब यही आदत काम पूरा करने से रोकने लगे, डेडलाइन मिस होने लगे और नए मौके लेने से डर लगने लगे-तो हमें इसे थोड़ा अलग तरीके से समझने की जरूरत है। आगे पढ़िए...